झारखंड : मौत पर नहीं पहुंचे परिजन, यहां बेटियों ने कंधा देकर पिता की अर्थी को श्मशान घाट तक पहुंचाया, दी मुखाग्नि

News Aroma Media
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रामगढ़: कोरोना काल में  जिले का हर इलाका प्रभावित है। हर दिन यहां 7 से 8 लोगों की मौत सरकारी आंकड़ों के मुताबिक हो रही है।

वर्तमान परिस्थिति ने ऐसे हालात पैदा कर दिए हैं कि सारे रूढ़िवाद हाशिए पर चले गए हैं।

बस इंसानियत ही लोगों की हिम्मत बनी हुई है। रामगढ़ शहर में सोमवार को एक रिटायर्ड शिक्षक के निधन के बाद उनके घर में भी परिजनों की उपस्थिति नहीं हो पाई।

नतीजा यह हुआ कि बेटियों ने ही कंधा देकर पिता की अर्थी को श्मशान घाट तक पहुंचाया।

इसके बाद बेटियों ने ही पिता को मुखाग्नि भी दी। ऐसे कई मार्मिक और हृदय विदारक दृश्य लगभग हर दिन देखने को मिल रहे हैं।

ऐसे विपरीत हालात में विश्व हिंदू परिषद के सदस्यों के द्वारा भी लोगों को सहयोग किया जा रहा है।

शहर के प्रसिद्ध गांधी मेमोरियल हाई स्कूल के सेवानिवृत्त शिक्षक अजीत श्रीवास्तव का निधन सोमवार को हो गया था।

उनके अंतिम संस्कार का जिम्मा दोनों बेटियों प्रियंका और अंजलि ने उठाया।

प्रियंका के पति प्रभाकर श्रीवास्तव ने बताया कि उनके ससुर अजीत श्रीवास्तव कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। उनको देखने के लिए वे प्रियंका के साथ ससुराल आए थे।

यहां अंजलि के द्वारा लगातार अजीत श्रीवास्तव की सेवा की जा रही थी। इसी बीच उनका निधन हो गया।

शास्त्रों के अनुसार पिता को पुत्र के द्वारा मुखाग्नि दी जाती है। उनका कोई पुत्र नहीं था।

इसलिए प्रियंका नहीं मुखाग्नि देकर उनका अंतिम संस्कार किया।

इस विपरीत परिस्थिति में विश्व हिंदू परिषद के सदस्य छोटू वर्मा, दीपक मिश्रा व उनके सहयोगियों ने भी उनका मनोबल बढ़ाया।

अंतिम संस्कार में भी काफी सहयोग किया। दामोदर नदी तट पर उन लोगों के सहयोग से ही शहर के प्रसिद्ध शिक्षक के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार हो पाया है।

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