‘कोचिंग माफिया’ पर लगाम लगाने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत: एबीवीपी महासचिव सोलंकी

एबीवीपी महासचिव सोलंकी ने 'कोचिंग माफिया' पर लगाम कसने और फीस तथा छात्रों की संख्या सीमित करने की मांग की।

Razi Ahmad
4 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

नयी दिल्ली: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने ‘‘कोचिंग माफिया’’ पर लगाम लगाने के लिए ऐसे संस्थानों के वास्ते कड़े नियम बनाने की तत्काल आवश्यकता जताई है, जिनमें फीस और छात्रों की संख्या पर एक सीमा तय करना भी शामिल है। इसके साथ ही, संगठन ने आरोप लगाया कि नगर निकाय अधिकारियों और पीजी मालिकों की मिलीभगत के कारण छात्रों के लिए असुरक्षित आवास की समस्या पैदा होती है।

एबीवीपी के राष्ट्रीय महासचिव वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि ‘कोचिंग कारोबार’ एक समानांतर व्यवस्था बन गई है, जिसे रातों-रात खत्म नहीं किया जा सकता, लेकिन मौजूदा कानूनों और नियमों के जरिये इसे नियमित करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘पूरे देश में कोचिंग कारोबार एक पूरा उद्योग बन गया है। आप इसे कोचिंग माफिया या समानांतर व्यवस्था कह सकते हैं। इस समानांतर व्यवस्था के उभरने की एक वजह है — प्रतियोगी परीक्षाएं अलग से आयोजित की जाती हैं और उनके लिए जिस तरह की तैयारी की ज़रूरत होती है, वह स्कूलों तथा कॉलेजों में नहीं मिलती… ज़ाहिर है, एक समानांतर उद्योग खड़ा हो गया है।’’

सोलंकी ने कहा, ‘‘…इतनी बड़ी व्यवस्था को रातों-रात खत्म नहीं किया जा सकता, लेकिन इसे निश्चित रूप से ठीक से विनियमित किया जा सकता है। इसे विनियमित करने के लिए जो कानून और नियम पहले ही बनाए जा चुके हैं, उन्हें ठीक से लागू करने की आवश्यकता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमने 2024 में सरकार से इसकी मांग की थी और ‘कोचिंग विनियमन अधिनियम’ के लिए सुझाव भी दिए थे।’’

सोलंकी ने कहा कि विनियमन में स्थानीय स्तर पर कोचिंग संस्थानों की निगरानी और सुरक्षा मानकों, फीस तथा छात्रों की संख्या की जांच शामिल होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘हर शहर और ज़िले में, ज़िलाधिकारी के अधीन एक नोडल अधिकारी कोचिंग संस्थानों की देखरेख कर सकता है। सुरक्षा मानकों, फ़ीस के ढांचे या किसी संस्थान में छात्रों की संख्या की सीमा के मामले में कोई समझौता नहीं होना चाहिए।’’

सोलंकी ने कहा, ‘‘इन सभी चीज़ों को स्थानीय स्तर पर ठीक से लागू किया जाना चाहिए। अगर ऐसा होता है, तो कोचिंग संस्थानों से जुड़ी कई चिंताएं कम हो जाएंगी।’’

दिल्ली के मुखर्जी नगर और राजेंद्र नगर जैसे ‘कोचिंग हब’ में आग लगने और बाढ़ जैसी घटनाओं, साथ ही सूरत और पुणे के कोचिंग केंद्रों में हुई घटनाओं का ज़िक्र करते हुए सोलंकी ने कहा कि कोचिंग से जुड़ा दबाव भी चिंता का विषय बन गया है।

एबीवीपी महासचिव ने कहा, ‘‘कोटा में कोचिंग से जुड़े दबाव के कारण आत्महत्या की दर एक बड़ी चिंता का विषय रही है।’’ उन्होंने माता-पिता पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ की ओर भी ध्यान दिलाया और कोचिंग फीस पर सीमा तय करने की मांग की।

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) के चुनाव से पहले दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी इमारत के गिरने पर सोलंकी ने कहा कि एबीवीपी ने सरकार और प्रशासन के सामने लगातार छात्रों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया है।

सोलंकी ने कहा कि जिस अधिकारी ने इमारत को हॉस्टल के तौर पर उपयोग करने की इजाज़त दी और जो अधिकारी इलाके में सुरक्षा मानकों की जांच के लिए ज़िम्मेदार था, वे ‘‘मुख्य रूप से ज़िम्मेदार’’ हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘…एमसीडी (दिल्ली नगर निगम) आयुक्त यह सुनिश्चित करने के लिए भी ज़िम्मेदार हैं कि सुरक्षा संबंधी ज़रूरतें पूरी हों।’’

सोलंकी ने कहा, ‘‘सत्य निकेतन में हमें पता चला कि एमसीडी अधिकारियों और पीजी मालिकों के बीच मिलीभगत है। मेरा कहना है कि सुरक्षा मानकों से जुड़े प्रमाणपत्र और उनका सत्यापन हासिल करने में भ्रष्टाचार होता है।’’

Share This Article
रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।