
अभिनेत्री अदिति राव हैदरी का मानना है कि भारतीय सिनेमा में महिलाओं के लिए सशक्त किरदारों का दौर शुरू हो चुका है, लेकिन इस बदलाव को और गति देने के लिए कलाकारों और फिल्मकारों को साहसिक फैसले लेने होंगे. उनके अनुसार, महिलाओं के बिना न केवल जीवन अधूरा है, बल्कि कोई भी कहानी पूरी नहीं हो सकती. उन्होंने कहा कि बदलाव अपने आप नहीं आता, बल्कि उसे लाने के लिए निरंतर प्रयास करना पड़ता है.
कला के प्रति ईमानदारी सबसे जरूरी
अदिति का कहना है कि कलाकारों को तात्कालिक आर्थिक लाभ की बजाय ऐसी कहानियों को चुनना चाहिए जो लंबे समय तक समाज पर सकारात्मक प्रभाव छोड़ें. उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि कोई प्रोजेक्ट आपके मूल्यों और सोच से मेल नहीं खाता, तो उसे ठुकराने का साहस भी होना चाहिए. उनके लिए हमेशा सिनेमा और कला सर्वोपरि रहे हैं और कला के प्रति ईमानदारी ही अंततः सही अवसरों तक पहुंचाती है.
महिला केंद्रित फिल्मों को जोखिम नहीं, अवसर समझें
अदिति ने चिंता जताई कि आज भी महिला केंद्रित फिल्मों को अक्सर जोखिम के रूप में देखा जाता है. उनका मानना है कि निर्माताओं को यह जोखिम उठाना चाहिए, क्योंकि सिनेमा में महिलाओं को केवल सहायक पात्रों तक सीमित नहीं रखना चाहिए. उन्हें गरिमा, संवेदनशीलता और मजबूत इच्छाशक्ति वाले बहुआयामी किरदारों में प्रस्तुत करना जरूरी है. अदिति ने विश्वास जताया कि भारतीय फिल्म उद्योग सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में महिला कलाकारों के लिए बेहतर और अधिक अवसर उपलब्ध होंगे.

