
बॉलीवुड के लोकप्रिय अभिनेता शाहिद कपूर इन दिनों अपनी फिल्म कॉकटेल 2 को लेकर चर्चा में हैं। हालांकि आज वह इंडस्ट्री के बड़े सितारों में गिने जाते हैं, लेकिन उनका शुरुआती सफर चुनौतियों और संघर्षों से भरा रहा। हाल ही में एक पॉडकास्ट में शाहिद ने अपने करियर के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि उन्होंने कभी खुद को विशेषाधिकार प्राप्त (प्रिविलेज्ड) नहीं माना।
परिवार से मिला सहारा, लेकिन रास्ता खुद बनाया
शाहिद ने कहा कि उनके पिता पंकज कपूर एक चरित्र अभिनेता रहे हैं, जबकि उनकी मां नीलिमा अज़ीम कम उम्र से कथक नृत्य से जुड़ी रही हैं। उन्होंने बताया कि उनका बचपन किराए के घरों में बीता और फिल्म इंडस्ट्री में पहचान बनाने के लिए उन्हें लगातार मेहनत करनी पड़ी। शाहिद के अनुसार, यही कारण है कि उनमें कभी भी विशेषाधिकार वाली सोच विकसित नहीं हुई।
250 ऑडिशन के बाद मिला मौका
इंडस्ट्री में संघर्ष की अलग-अलग परिभाषाओं पर टिप्पणी करते हुए शाहिद ने कहा कि कुछ लोग बड़े बैनर और नामी निर्देशकों के साथ अपने करियर की शुरुआत कर लेते हैं, जबकि उन्हें यहां तक पहुंचने के लिए करीब 250 ऑडिशन देने पड़े। उनका मानना है कि सफलता के पीछे वर्षों की मेहनत और धैर्य छिपा होता है।
कपड़े खरीदने तक के नहीं थे पैसे
शाहिद ने अपने कठिन दिनों को याद करते हुए बताया कि एक समय ऐसा भी था जब उनके पास लोखंडवाला मार्केट से कपड़े खरीदने तक के पैसे नहीं होते थे। आज लोग उनके फैशन सेंस की तारीफ करते हैं, लेकिन अभिनेता के लिए यह सफर संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास की मिसाल रहा है।

