भोजपुरी, मगही और अंगिका को लेकर आदिवासी छात्र संघ का बड़ा ऐलान, झारखंड बंद की दी चेतावनी!

आदिवासी छात्र संघ ने भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषा को लेकर झारखंड सरकार का विरोध किया। संगठन ने चेतावनी दी कि मान्यता मिलने पर राज्यव्यापी झारखंड बंद किया जाएगा।

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रांचीः आदिवासी छात्र संघ (ACS) केंद्रीय समिति ने भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषा को लेकर झारखंड सरकार के खिलाफ बड़ा विरोध जताया है। बुधवार (21 मई 2026) को करमटोली स्थित आदिवासी छात्रावास पुस्तकालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में संघ के नेताओं ने कहा कि ये भाषाएं झारखंड की मूल क्षेत्रीय भाषाएं नहीं हैं, इसलिए इन्हें राज्य में लागू नहीं किया जाना चाहिए। संघ ने कहा कि अगर सरकार इन भाषाओं को मान्यता देती है, तो आदिवासी छात्र संघ राज्यव्यापी झारखंड बंद का ऐलान करेगा।

सभी वर्गों से समर्थन की अपील

संघ की ओर से कहा गया कि प्रस्तावित बंद को सफल बनाने के लिए राज्य के सभी वर्गों—सामान्य, एससी और ओबीसी समुदाय—से सहयोग की अपील की जाएगी। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन पुलिस प्रशासन के खिलाफ नहीं, बल्कि सरकार की नीतियों के विरोध में होगा नेताओं ने कहा कि विरोध शांतिपूर्ण तरीके से किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर सांकेतिक गिरफ्तारी भी दी जाएगी, लेकिन किसी भी सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।

नौकरी और परीक्षाओं को लेकर जताई चिंता

आदिवासी छात्र संघ का कहना है कि इन भाषाओं को लागू करने से झारखंड की नौकरियों और प्रतियोगी परीक्षाओं में बाहरी प्रभाव बढ़ेगा। संगठन ने कहा कि चाहे JPSC हो या JTET, इन परीक्षाओं में स्थानीय जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। संघ के नेताओं ने सवाल उठाया कि जब झारखंड की जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाएं बिहार में लागू नहीं हैं, तो बिहार की भाषाओं को झारखंड में क्यों लागू किया जा रहा है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुशील कुमार मिंज, जतरु उरांव, प्रो. सतीश भगत, सुरेश टोप्पो, ACS के रांची विश्वविद्यालय अध्यक्ष संजय महली, दिनेश भगत, मुकेश असुर, अनीश उरांव, रमेश उरांव और महावीर उरांव समेत कई छात्र-छात्राएं और अन्य लोग मौजूद थे।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।