
सुशोभित
फ़ुटबॉल का खेल शतरंज की तरह होता है। इसमें आपने कैसी बिसात बिछाई है, क्या रणनीति अपनाई है और आप इसमें क्या चालें चलने जा रहे हैं, इसका बड़ा महत्त्व होता है। इसी परिप्रेक्ष्य में- आइये, अर्जेन्तीना और स्पेन के बीच कल रात होने जा रहे विश्वकप फ़ाइनल का तकनीकी दृष्टि से पूर्वावलोकन करते हैं। अर्जेन्तीना 4-4-2 के फ़ॉर्मेशन के साथ मैदान में उतरेगी। लियोनेल मेस्सी और हूलीयन अल्वारेज़ फ़ॉरवर्ड होंगे। अल्वारेज़ स्पेन के सेंट्रल-डिफ़ेंडरों को ‘प्रेस’ करेंगे। लॉतारो मार्तीनेज़ बेंच से आएँगे- सम्भवतया 70वें मिनट के बाद। विश्वकप के दौरान वो इस भूमिका में बहुत प्रभावी सिद्ध हुए हैं। शुरुआती मैचों में लॉतारो ही स्टार्ट करते थे और अल्वारेज़ बेंच से आते थे, लेकिन अब अर्जेन्तीना के कोच लियोनेल स्कोलनी ने अपना मन बदल लिया है। लेकिन जब लॉतारो बेंच से आएँगे, तो अल्वारेज़ पहले की तरह बैठेंगे नहीं। वो दोनों सेंटर फ़ॉरवर्ड की पोजिशन में खेलेंगे और मेस्सी राइट-विंग में चले जाएँगे। तब रोद्रीगो दी-पॉल उनके लिए जगह ख़ाली करेंगे।
इंग्लैंड के विरुद्ध मैच में स्कोलनी ने दी-पॉल को बिठाकर जूलियानो सिमियोने को स्टार्टिंग-इलेवन में उतारा था। इंग्लैंड की डायरेक्ट और फिजिकल-शैली के मद्देनज़र वही सही निर्णय था। लेकिन स्पेन की टीम बहुत तकनीकी फ़ुटबॉल खेलती है और गेंद को अपने पास रखना पसंद करती है। ऐसे में यह तय है कि सिमियोने शुरुआती लाइन-अप में नहीं होंगे, दी-पॉल ही उतरेंगे। अर्जेन्तीना के कप्तान मेस्सी ख़ुद भले ही बार्सीलोना की ला-मसीया अकादमी से प्रशिक्षित हों और स्पैनिश फ़ुटबॉल को भलीभाँति समझते हों, लेकिन अर्जेन्तीना के शेष खिलाड़ी इससे अनभिज्ञ हैं। उनमें से कुछ तो अब अर्जेन्तीनी लीग में खेल रहे हैं- कोई बोका जूनियर्स में तो कोई रीवर प्लेट में। तब स्पैनिशों से गेंद छीनना अर्जेन्तीना की मिडफ़ील्ड के लिए चुनौती होगी।
4-4-2 के फ़ॉर्मेशन में अर्जेन्तीना चार मिडफ़ील्डर मैदान में उतारेगी- एन्ज़ो फ़र्नान्दीज़, एलेक्सिस मैक-एलीस्टर, लियोन्द्रो परीदेस और रोद्रीगो दी-पॉल। इनमें से परीदेस और दी-पॉल डिफ़ेंसिव ड्यूटी पर ध्यान देंगे, एन्ज़ो और मैक-एलीस्टर आक्रमण में योगदान देंगे। चार डिफ़ेंडरों में दो सेंटर-बैक के काम तय हैं- कूती रोमेरो और लिसान्द्रो मार्तीनेज़ स्पेन के सेंटर-फ़ारवर्ड ओयरज़बाल और फ़ाल्स-नाइन दानी ओल्मो को मार्क करेंगे। शेष दो फ़ुल-बैक्स ताग्लियाफ़ीको और मोलीना आक्रमण में योगदान देंगे।
ताग्लियाफ़ीको लेफ़्ट-बैक हैं और उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती स्पेन के राइट-विंगर लमीन यमाल को नियंत्रण में रखना है। अगर लमीन उन्हें छकाकर पेनल्टी बॉक्स में क्रॉस देते रहे तो स्पेन को रोक पाना नामुमकिन हो जाएगा। यह ताग्लियाफ़ीको के कॅरियर की सबसे बड़ी चुनौती होगी। राइट-बैक मोलीना को स्पेन के लेफ़्ट-विंगर एलेक्स बायेना पर अंकुश रखना होगा। अर्जेन्तीना के कोच 70वें मिनट के आसपास ताग्लियाफ़ीको को बिठाकर एक अटैकिंग ऑप्शन के रूप में नीको गोन्ज़ालेस को उतार सकते हैं और मोलीना की जगह भी मोन्तीएल आ सकते हैं, लेकिन यह बहुत कुछ खेल की स्थिति पर निर्भर करेगा। अलबत्ता, स्पेन के लिए बेंच से पेद्री, फ़ेरान तोरेस, मिकेल मेरीनो, नीको विलियम्स का आना तय है। स्पेन 4-2-3-1 के फ़ॉर्मेशन में खेलेगी। फ़र्स्ट-हाफ़ में मेस्सी का सामना स्पेन और बार्सीलोना के युवा सेंटर-बैक पाउ कुबार्सी से होगा। यह कुबार्सी की अग्निपरीक्षा सिद्ध होने जा रही है। सेकंड-हाफ़ में अगर मेस्सी राइट-फ़्लैन्क में गए तो उन्हें स्पेन के तेज़तर्रार लेफ़्ट-बैक मार्क कुकुरेया से निपटना होगा। मेस्सी ने इस विश्वकप में सर्वाधिक सक्सेसफ़ुल ड्रिबल किए हैं और कुकुरेया ने इस विश्वकप में एक भी खिलाड़ी को अपने से ड्रिबल जीतने नहीं दिया है। तब यह मैच के भीतर एक और रोमांचक मैच की तरह होगा।
स्पेन की मिडफ़ील्ड में रोद्री और फ़ाबियान रूइज़ उतरेंगे और अर्जेन्तीना की मिडफ़ील्ड के पास उनका कोई जवाब नहीं होने वाला है। इन मायनों में इस खेल का फ़ैसला मिडफ़ील्ड में श्रेष्ठता के संघर्ष से होगा। अगर रोद्री और रूइज़ ने खेल के सूत्र अपने हाथों में ले लिए तो स्पेन, अर्जेन्तीना को गेंद छूने भी नहीं देगी। वैसे में अर्जेन्तीना अपनी चिर-परिचित कैऑटिक-शैली की फ़ुटबॉल खेलने की कोशिश करेगी- हाई प्रेस, लॉन्ग बॉल्स, काउंटर-अटैक, फ़ॉउल्स। अर्जेन्तीना स्पेन से तकनीकी-श्रेष्ठता की लड़ाई नहीं जीत सकती, लेकिन जोशोख़रोश उसमें स्पैनिशों से अधिक है। वह स्पेन की लय को बाधित करने के लिए जी-जान लगा देगी।
अर्जेन्तीना के फ़ुल-बैक्स और मिडफ़ील्डरों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी मेस्सी तक गेंद को पहुँचाना। रोद्री और रूइज़ के होते हुए मेस्सी को सेंट्रल-फ़ील्ड में गेंद नहीं मिलने वाली। उन्हें आक्रमण के लिए नए एवेन्यूज़ खोजने होंगे। बहुत कुछ सेट-पीसेस पर भी निर्भर करेगा। अर्जेन्तीना ख़तरनाक-स्पेस में फ्री-किक जीतने की कोशिश करेगी और तब मेस्सी पर भरोसा करेगी कि वो उस पोजिशन से गोल करें। पेनल्टी मिलने की स्थिति में क्या मेस्सी पेनल्टी लेंगे- यह सवाल क़ायम रहेगा। इस बार अल्वारेज़ या लॉतारो पेनल्टी ले सकते हैं। क्योंकि मेस्सी पहले ही इस विश्वकप में दो बार पेनल्टी मिस कर चुके हैं।
अर्जेन्तीना और स्पेन के इस मुक़ाबले के भीतर मेस्सी-कुकुरेया, ताग्लियाफ़ीको-लमीन, रोमेराे-ओयरज़बाल, परीदेस-रोद्री की भिड़ंत दर्शनीय होगी। यह दो भिन्न महाद्वीपों ही नहीं, दो भिन्न संस्कृतियों, नज़रियों, फिलॉस्फियों, शैलियों का भी टकराव होगा। भारतीय समयानुसार रविवार रात साढ़े 12 बजे मैच शुरू होगा और अगले दो या तीन घंटों तक पूरी दुनिया के फ़ुटबॉलप्रेमी दम साधे इसके एक-एक पल को निहारेंगे। इन पंक्तियों का लेखक भी उनमें शामिल होगा!
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

