हिमंत ने असम-अरुणाचल सीमा पर शांति की अपील की, कहा- सीमाएं दिलों को नहीं बांट सकतीं

असम-अरुणाचल सीमा पर फिर झड़प, मुख्यमंत्री ने की शांति की अपील

Neeral Prakash
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गुवाहाटी: असम-अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर एक और झड़प की सूचना के बाद मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बृहस्पतिवार को दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी सीमा लोगों के दिलों को नहीं बांट सकती जो पीढ़ियों से भाई-बहन की तरह साथ रह रहे हैं।
अरुणाचल प्रदेश की सीमा से सटे असम के धेमाजी जिले में प्रदर्शनकारियों के बीच फिर से झड़प हुई। भीड़ को काबू में करने के लिए पड़ोसी राज्य अरुणाचल प्रदेश की पुलिस ने हवा में गोली चलाई जबकि असम में दूसरे दिन भी अनिश्चितकालीन आर्थिक नाकेबंदी जारी है।
शर्मा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मैं असम और अरुणाचल के लोगों से शांति और सद्भाव बनाए रखने की अपील करता हूं। सीमाएं हमारे राज्यों को तय कर सकती हैं लेकिन वे कभी भी हमारे दिलों को नहीं बांट सकतीं।’’
अरुणाचल प्रदेश के अपने समकक्ष पेमा खांडू और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को टैग करते हुए असम के मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर के इन दो राज्यों के बीच ऐसा रिश्ता है जो सीमाओं से कहीं आगे है।
उन्होंने कहा, ‘‘पीढ़ियों से दोनों राज्यों के लोग प्यार, स्नेह और आपसी सम्मान के बंधन में बंधकर भाई-बहन की तरह रहे हैं।’’
शर्मा ने इस बात पर जोर दिया कि हाल के वर्षों में दोनों राज्यों ने बातचीत और दोस्ती के जरिए अपने अधिकतर सीमा विवाद सुलझा लिए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘अब सिर्फ 52 गांव बचे हैं और दोनों राज्यों की सरकारें इस विवाद को पूरी तरह सुलझाने के लिए इसी भावना के साथ बातचीत जारी रखेंगी।’’
आजादी के बाद अरुणाचल प्रदेश शुरू में केंद्र-शासित क्षेत्र था और बाद में केंद्र-शासित प्रदेश बना; 1987 में इसे पूर्ण राज्य का दर्जा मिला।
अरुणाचल प्रदेश को राज्य का दर्जा मिलने के बाद एक त्रिपक्षीय समिति बनाई गई जिसने असम से कुछ इलाके अरुणाचल प्रदेश को सौंपने की सिफारिश की। असम ने इसका विरोध किया और यह मामला उच्चतम न्यायालय के विचाराधीन है।
असम और अरुणाचल प्रदेश की सीमाएं उदलगुरी, सोनितपुर, बिस्वनाथ, लखीमपुर, धेमाजी, तिनसुकिया, डिब्रूगढ़ और चराइदेव जिलों और पड़ोसी राज्य के 12 जिलों के साथ 804.1 किलोमीटर तक फैली हुई हैं।
दोनों राज्यों के बीच अंतर-राज्यीय सीमा पर विवाद के 1,200 बिंदु हैं।
असम सरकार ने 29 जुलाई को राज्य विधानसभा को बताया कि अरुणाचल प्रदेश ने 16,144.01 हेक्टेयर जमीन पर कब्जा कर रखा है। कब्जे वाली इस जमीन में से अरुणाचल प्रदेश 858.91 वर्ग किलोमीटर जमीन पर अपना दावा कर रहा है।
दोनों राज्यों ने सीमा विवादों को सुलझाने के लिए 12 क्षेत्रीय समितियां बनाई हैं और इन समितियों की सिफारिशों के आधार पर मुद्दों को सुलझाने के लिए कदम उठा रहे हैं। इन समितियों ने संयुक्त रूप से विवादित क्षेत्रों का दौरा किया है और संबंधित पक्षों के साथ बातचीत की है।
दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने 15 जुलाई 2022 को नामसाई घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए थे जिसके बाद अरुणाचल प्रदेश द्वारा दावा किए जा रहे असम के 123 गांवों को लेकर मतभेद दूर करने की प्रक्रिया शुरू हुई।
इस संबंध में बाद में 20 अप्रैल 2023 को राष्ट्रीय राजधानी में केंद्रीय गृह मंत्री की मौजूदगी में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
अरुणाचल प्रदेश द्वारा दावा किए गए 123 गांवों में से 71 गांवों को लेकर विवाद का समाधान हो चुका है, जबकि शेष 52 गांवों से जुड़े मुद्दों के समाधान की प्रक्रिया जारी है।

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नीरल प्रकाश के पास पत्रकारिता में 2 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने एंकरिंग, रिपोर्टिंग और स्क्रिप्ट राइटिंग में काम किया है। पिछले 2 सालों से वे IDTV इंद्रधनुष के साथ काम कर रही हैं, जहां उन्होंने ऑन-एयर प्रस्तुतिकरण के साथ-साथ बैकएंड कंटेंट क्रिएशन में भी योगदान दिया। समाचार रिपोर्टिंग के अलावा, उन्होंने आकर्षक स्क्रिप्ट तैयार करने और कहानी को पेश करने का अनुभव भी प्राप्त किया है।