नई दिल्ली : अगर आपके बैंक खाते में मिनिमम बैलेंस नहीं रहता है, तो यह खबर आपके लिए है। पिछले चार वित्तीय वर्षों में बैंकों ने ग्राहकों से मिनिमम एवरेज बैलेंस नहीं रखने पर जुर्माने के रूप में 26,170 करोड़ रुपये से ज्यादा वसूले हैं। वित्त वर्ष 2022-23 से 2025-26 के बीच की यह जानकारी वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में लिखित जवाब के जरिए दी। आंकड़ों के मुताबिक, इस वसूली में सबसे बड़ा हिस्सा निजी बैंकों का रहा, जबकि सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम रही। सिर्फ वित्त वर्ष 2025-26 में ही बैंकों ने मिनिमम बैलेंस चार्ज के जरिए 7,086.63 करोड़ रुपये की वसूली की। इसमें निजी बैंकों ने 4,948.71 करोड़ रुपये और सरकारी बैंकों ने करीब 2,138 करोड़ रुपये जुटाए। हालांकि, सरकार का कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने पिछले कुछ वर्षों में ऐसे शुल्कों में काफी राहत दी है। इसके बावजूद, मिनिमम बैलेंस का नियम अब भी करोड़ों बैंक ग्राहकों पर आर्थिक बोझ बना हुआ है।


