
पटना : बिहार में सोमवार से रेवेन्यू एडमिनिस्ट्रेशन की व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई है। बिहार रेवेन्यू सर्विस एसोसिएशन और बिरसा यूनाइटेड के आह्वान पर राज्य के सभी सर्किल ऑफिसर (CO) अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि सरकार DCLR के पद पर नियुक्ति को लेकर लगातार अपने वादों से पीछे हट रही है और हाई कोर्ट के आदेश का भी पालन नहीं किया जा रहा है। इसी के विरोध में उन्होंने काम पूरी तरह बंद कर दिया है।
जानिए क्या है पूरा मामला
दरअसल, इस हड़ताल की मुख्य वजह DCLR यानी डिप्टी कलेक्टर लैंड रिफॉर्म्स के पद पर नियुक्ति का मुद्दा है। रेवेन्यू सर्विस एसोसिएशन का आरोप है कि सरकार इस मामले को लेकर गंभीर नहीं है और लंबे समय से लंबित मांगों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। एसोसिएशन का कहना है कि हाई कोर्ट भी इस पद पर रेवेन्यू सर्विस अधिकारियों की नियुक्ति का निर्देश दे चुका है, लेकिन अब तक उस पर अमल नहीं हुआ। स्थिति इसलिए भी ज्यादा गंभीर हो गई है क्योंकि राज्य में रेवेन्यू कर्मचारी पहले से ही हड़ताल पर हैं। कर्मचारी पिछले 17 दिनों से प्रमोशन, ट्रांसफर और सैलरी में अंतर समेत अपनी 17 सूत्री मांगों को लेकर काम का बहिष्कार कर रहे हैं। अब अधिकारियों के भी हड़ताल पर जाने से ज़ोनल ऑफिस में पूरी तरह सन्नाटा छा गया है।
सर्टिफिकेट और सर्वे के काम अटके
इसका सीधा असर राज्य में चल रहे स्पेशल लैंड सर्वे और कंसोलिडेशन प्रोग्राम पर पड़ा है। ये दोनों प्रोजेक्ट किसानों और जमीन मालिकों के लिए बेहद अहम माने जाते हैं। लेकिन ज़ोनल ऑफिस में काम बंद होने से इनकी रफ्तार काफी धीमी हो गई है। म्यूटेशन, जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र जैसे कई जरूरी काम भी ज़ोनल ऑफिस से ही होते हैं। ऐसे में हड़ताल के चलते आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जमीन से जुड़े विवादों के निपटारे और रेवेन्यू कलेक्शन पर भी इसका असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
