नयी दिल्ली: केंद्र सरकार ने शुक्रवार को जनगणना नियम, 1990 में संशोधन किया, जिसके तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जनगणना प्रक्रिया के दौरान सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त निजी विद्यालयों के शिक्षकों को भी प्रगणक नियुक्त करने की अनुमति दी गई है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

भारत के महापंजीयक (आरजीआई) मृत्युंजय कुमार नारायण द्वारा जारी राजपत्र अधिसूचना में केंद्र ने 1990 के नियमों में संशोधन किया। इन नियमों में कहा गया है कि राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश शिक्षकों, लिपिकों या किसी अधिकारी अथवा अन्य व्यक्ति को प्रगणक के तौर पर नियुक्त कर सकते हैं।
शुक्रवार की अधिसूचना में कहा गया है कि प्रगणक के रूप में कार्य करने के लिए जनगणना अधिकारी के तौर पर निम्नलिखित लोगों को नियुक्त किया जा सकता है: (i) सरकारी, स्थानीय निकायों, सहायता प्राप्त या गैर-सहायता प्राप्त निजी निकायों, सोसायटी या न्यासों के किसी भी शैक्षणिक संस्थान के शिक्षक; (ii) केंद्र सरकार, राज्य सरकार, स्थानीय निकाय या किसी प्रतिष्ठान के लिपिक या अधिकारी।
इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, वैधानिक निकाय, बैंक, कंपनियां, संस्थान, सोसायटी और न्यास शामिल हैं; (iii) ऐसा कोई भी व्यक्ति, जिसे राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासन उपयुक्त समझे।
ये संशोधन पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल्स कॉन्फ्रेंस की ओर से दायर एक याचिका की पृष्ठभूमि में किए गए हैं।
याचिका में जनगणना ड्यूटी के लिए गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूलों के शिक्षकों की सेवाएं लेने और उन्हें तैनात करने को चुनौती दी गई है।
न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बराड़ ने आठ अक्टूबर के आदेश में हरियाणा सरकार के उन दो पत्रों पर रोक लगा दी थी, जिनमें जनगणना ड्यूटी के लिए उपलब्ध शिक्षकों का ब्योरा मांगा गया था। अब इस मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल, 2027 को निर्धारित की गई है।
याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि जनगणना अधिनियम, 1948 या उसके तहत बनाए गए नियमों में सरकार को गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूलों के शिक्षकों को प्रगणक या पर्यवेक्षक नियुक्त करने के लिए सेवाएं लेने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है।
याचिका में कहा गया कि जनगणना अधिनियम की धारा 4ए में जनगणना संबंधी कार्यों के लिए स्थानीय निकायों के अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं लेने का विशेष प्रावधान है। निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूल और उनके कर्मचारी ‘स्थानीय निकाय’ की परिभाषा या दायरे में नहीं आते।
वर्ष 2027 की जनगणना स्वतंत्रता के बाद आठवीं जनगणना होगी। यह दो चरणों में आयोजित की जा रही है। पहले चरण में गृह सूचीकरण और घरों की गणना होगी, जबकि दूसरे चरण में आबादी की गणना की जाएगी।
दस वर्ष में एक बार होने वाली यह जनगणना वर्ष 2021 में होनी थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था।


