दुमका में अस्पताल के नाम बदलने पर भड़के चंपाई सोरेन, बोले- फूलो-झानो के नाम से ही हो पहचान

दुमका के फूलो-झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल का नाम बदलने पर चंपाई सोरेन ने विरोध जताया। उन्होंने आदिवासी विरासत के सम्मान में फूलो-झानो नाम बरकरार रखने की मांग की।

Razi Ahmad
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Champai Soren : दुमका स्थित फूलो झानो मेडिकल कॉलेज के नवनिर्मित अस्पताल का नाम बदलकर ‘गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल’ किए जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा विधायक चंपाई सोरेन ने कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने इसे संथाल हूल के इतिहास और वीरांगनाओं की विरासत को कमजोर करने की कोशिश बताया।

पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन शुक्रवार को अपने समर्थकों के साथ अस्पताल परिसर पहुंचे और कहा कि अस्पताल का नाम फूलो-झानो के नाम से ही होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि संस्थान के नाम में ‘मुर्मू’ शब्द भी जोड़ा जाए, ताकि आदिवासी इतिहास और पहचान को सम्मान मिल सके।

30 जून तक का अल्टीमेटम

चंपाई सोरेन ने अस्पताल निर्माण एजेंसी के प्लानिंग मैनेजर और मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से भी इस मुद्दे पर बातचीत की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 30 जून तक नाम में बदलाव नहीं किया गया, तो हूल दिवस के मौके पर संथाल परगना के हजारों आदिवासी समाज के लोग, माझी हड़ाम और पारंपरिक स्वशासन से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ जुटान करेंगे और खुद ही नाम बदलने की पहल करेंगे।

उन्होंने दुमका के दिग्घी गांव क्षेत्र में प्रस्तावित बस टर्मिनल का नाम चांद-भैरव के नाम पर रखने की मांग भी उठाई।

संथाल हूल में अहम भूमिका थी फूलो-झानो की

गौरतलब है कि वर्ष 1855 में अंग्रेजों के खिलाफ शुरू हुए संथाल विद्रोह में फूलो-झानो ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सिदो-कान्हू की बहनों ने महिलाओं को आंदोलन में शामिल होने के लिए प्रेरित किया था। उनकी वीरगाथाएं आज भी संथाल समाज में सम्मान के साथ याद की जाती हैं।

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रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।