
रांची : राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान (CIP) रांची को संसद के पृथक कानून के जरिए राष्ट्रीय महत्त्व का संस्थान घोषित करने और इसे पूर्ण स्वायत्तता देने की मांग उठाई है। राज्यसभा के शून्यकाल के दौरान इस विषय को प्रमुखता से उठाते हुए सांसद डॉ. वर्मा ने कहा कि 1918 में स्थापित 108 साल पुराना CIP देश के सबसे प्रतिष्ठित मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों में से एक है। यह संस्थान सालाना 1,17,000 से अधिक मरीजों का इलाज करता है, जिनमें से लगभग 80 प्रतिशत मरीज SC, ST और OBC वर्गों से आते हैं।
देश में मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने ‘राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो’ की वर्ष 2024 की रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसके मुताबिक देश में 1,70,746 लोगों ने आत्महत्या की। इसमें दिहाड़ी मजदूर, गृहिणियां, छात्र, किसान और कर्मचारी समेत समाज का हर वर्ग प्रभावित हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये आंकड़े देश में सुलभ और मजबूत मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की तत्काल आवश्यकता को दर्शाते हैं। उन्होंने ध्यान दिलाया कि स्वास्थ्य संबंधी संसदीय स्थायी समिति की 148वीं रिपोर्ट ने भी सीआईपी रांची को राष्ट्रीय महत्त्व का दर्जा देने की सिफारिश की है। इसके अलावा, केंद्रीय बजट 2026-27 में रांची और तेजपुर के मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों को क्षेत्रीय शीर्ष संस्थानों के रूप में उन्नत करने का फैसला CIP को पूर्ण स्वायत्तता देने का सही अवसर है।
उन्होंने संस्थान की जमीन से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बताया कि पुराने राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज 891.532 एकड़ भूमि और वर्तमान में उपलब्ध 552.23 एकड़ भूमि के बीच 339.302 एकड़ का अंतर दिख रहा है, जिसकी निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। NIMHANS बेंगलुरु (2012 अधिनियम) और AIIMS नई दिल्ली (1956 अधिनियम) का उदाहरण देते हुए सांसद ने केंद्र सरकार से अपील की कि CIP रांची को भी संसद के पृथक अधिनियम के तहत वैधानिक, शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता प्रदान करने के लिए समयबद्ध कार्रवाई की जाए।

