कोच्चि: प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने जाने-माने शिक्षाविद प्रो. एन. आर. माधव मेनन को शनिवार को श्रद्धांजलि दी और उनकी स्मृति में शुरू किया गया दूसरा ‘ट्रिब्यूट ऑफ ऑनर’ मेमोरियल पुरस्कार अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि को प्रदान किया। पुरस्कार समारोह कोच्चि के एक होटल में आयोजित किया गया था, जिसमें केरल उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन शामिल हुए। अपने उद्घाटन भाषण में, प्रधान न्यायाधीश ने देश में कानूनी शिक्षा और संस्था-निर्माण में मेनन के योगदान को याद किया और कहा कि उनके दृष्टिकोण ने वकीलों, न्यायाधीशों और कानून के विद्वानों की कई पीढ़ियों को आकार दिया है।

उन्होंने बताया कि मेनन ने 1986 में बेंगलुरु में नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसयू) की स्थापना की और पांच साल के एकीकृत एलएलबी पाठ्यक्रम की शुरुआत की, जिसने देश में कानूनी शिक्षा का परिदृश्य बदल दिया। इसके बाद, उन्होंने कोलकाता में ‘वेस्ट बंगाल नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूरिडिकल साइंसेज’ और भोपाल में ‘नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी’ की स्थापना की।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ‘‘जब कानून को सही तरीके से पढ़ाया जाए, तो यह सामाजिक बदलाव का एक साधन बन जाता है, न कि महज एक पेशे का लाइसेंस होता है।’’ उन्होंने कानूनी सहायता पर मेनन के जोर देने और इस विश्वास को भी रेखांकित किया कि कानूनी शिक्षा के केंद्र में गरीब और हाशिये पर रहने वाले लोग होने चाहिए। सीजेआई ने याद दिलाया कि कानूनी शिक्षा के क्षेत्र में एक राष्ट्रीय स्तर की जानी-मानी हस्ती बनने से पहले, मेनन ने केरल उच्च न्यायालय में वकालत करने के लिए पंजीकरण कराया था।
उन्होंने बताया कि केरल में अपने बाद के वर्षों के दौरान भी, उन्होंने वकीलों की निरंतर शिक्षा में मदद करके कानूनी समुदाय में अपना योगदान देना जारी रखा। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि वेंकटरमणि ने 1974 में पांडिचेरी के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज में दाखिला लिया था। उसी वर्ष मेनन ने इस संस्थान के प्राचार्य का पद संभाला था।


