जंतर-मंतर आंदोलन: परदे पर और पीछे: CJP की जुनूनी कोर टीम

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की आठ सदस्यीय कोर टीम में शामिल अभिजीत दिपके समेत सभी प्रमुख चेहरों की पृष्ठभूमि, भूमिकाएं और आंदोलन में उनकी जिम्मेदारियों को विस्तार से जानिए।

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राम गोपाल सिंह वर्मा

हम यह जानते हैं कि कॉकरोच जनता पार्टी, यानी CJP, किसी परंपरागत राजनीतिक दल की तरह वर्षों पुराने संगठन, स्थायी कार्यालय और पदाधिकारियों की लंबी शृंखला से नहीं निकली। इसकी शुरुआत मई 2026 में सोशल मीडिया पर किए गए एक व्यंग्यात्मक हस्तक्षेप से हुई और कुछ ही सप्ताह में यह बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं, पेपर लीक और सरकारी जवाबदेही जैसे प्रश्नों पर केंद्रित युवा आंदोलन में बदल गई। जंतर-मंतर पर इसका धरना आरंभ होने के बाद इसके संचालन के लिए स्वयंसेवकों, मीडिया प्रतिनिधियों, कानूनी सलाहकारों और कार्यक्रम समन्वयकों की अलग-अलग टीमें गठित की गईं। 24 जुलाई 2026 को प्रकाशित जानकारी के अनुसार आंदोलन के निर्णायक संचालन की जिम्मेदारी आठ सदस्यीय कोर टीम के पास है, जिसमें अभिजीत दिपके, सौरव दास, आशुतोष रांका, रतना सिंह, वैष्णवी गौर, आफरीन नवाज, दीपक बलियान और अमूल्य धवन शामिल हैं। यह समूह सामाजिक पृष्ठभूमि की दृष्टि से एकसमान नहीं है। इसमें राजनीतिक संचार विशेषज्ञ, खोजी पत्रकार, प्रबंधन सलाहकार, अधिवक्ता, सार्वजनिक नीति शोधकर्ता, उद्यमी, किसान आंदोलनों के कार्यकर्ता और विश्वविद्यालय के विद्यार्थी सम्मिलित हैं। यही विविधता इस आंदोलन की भाषा और संगठनात्मक शैली में भी दिखाई देती है।

इस आंदोलन के संस्थापक और सबसे पहचाने जाने वाले चेहरे अभिजीत दिपके लगभग 30 वर्ष के राजनीतिक संचार विशेषज्ञ हैं। उनका जन्म महाराष्ट्र के औरंगाबाद, अब छत्रपति संभाजीनगर, में एक दलित परिवार में हुआ। उन्होंने स्वयं अपने परिवार की आर्थिक पृष्ठभूमि को अत्यंत साधारण बताया है। उनके दादा किसान थे और उनके पिता ने आर्थिक अभावों के बीच अपना जीवन शुरू किया था। इस सामाजिक अनुभव ने दिपके की राजनीतिक चेतना को प्रभावित किया। वे डॉ. भीमराव आंबेडकर के लेखन और संवैधानिक विचारों से प्रेरणा लेने की बात करते हैं। जून 2026 में भारत लौटने पर उन्होंने सार्वजनिक रूप से आंबेडकर की आत्मकथा हाथ में लेकर अपने राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ को रेखांकित भी किया था।

दिपके ने पुणे में पत्रकारिता की पढ़ाई की। इसके बाद वे राजनीतिक संचार के क्षेत्र में सक्रिय हुए। वर्ष 2020 से 2023 के बीच वे आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया टीम से जुड़े रहे। यहाँ उन्होंने राजनीतिक संदेशों को मीम, व्यंग्य, छोटे वीडियो और सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से युवा वर्ग तक पहुँचाने का अनुभव अर्जित किया। उपलब्ध विवरणों के अनुसार उन्होंने दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग से संबंधित संचार कार्यों में भी योगदान दिया था। वर्ष 2023 में वे उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चले गए और बोस्टन विश्वविद्यालय से जनसंपर्क में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की। अमेरिका में रहते हुए भी वे भारत की राजनीतिक घटनाओं, विशेषकर युवाओं, शिक्षा और रोजगार से जुड़े प्रश्नों पर सोशल मीडिया के माध्यम से सक्रिय रहे।

16 मई 2026 को उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “अगर सारे कॉकरोच एकजुट हो जाएँ तो?” यह टिप्पणी उस विवाद की प्रतिक्रिया थी जिसमें बेरोजगार और व्यवस्था से असंतुष्ट युवाओं के लिए ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल की बात सामने आई थी। बाद में संबंधित टिप्पणी पर स्पष्टीकरण भी आया, लेकिन तब तक दिपके का व्यंग्यात्मक प्रश्न व्यापक युवा असंतोष की अभिव्यक्ति बन चुका था। कुछ डिजिटल कार्यकर्ताओं ने शीघ्र ही CJP का व्यंग्यात्मक नाम, वेबसाइट, प्रतीक और घोषणापत्र तैयार कर दिया। दिपके की विशेषता यह रही कि उन्होंने अपमान के रूप में प्रयुक्त शब्द को सामूहिक पहचान और प्रतिरोध के प्रतीक में बदल दिया। जून में वे अमेरिका से भारत लौटे और जंतर-मंतर के प्रदर्शन में प्रत्यक्ष रूप से शामिल हो गए। धरना स्थल पर उनका काम भाषण देने तक सीमित नहीं रहा। वे स्वयंसेवकों को शांतिपूर्ण रहने की हिदायत देने, पुलिस और प्रशासन से संवाद करने, मीडिया के प्रश्नों का उत्तर देने और आंदोलन की दिशा पर कोर टीम के साथ निर्णय लेने में सक्रिय रहे। उनके नेतृत्व की सबसे बड़ी शक्ति डिजिटल संचार की समझ है, जबकि आलोचक उनकी आम आदमी पार्टी से पूर्व संबद्धता के आधार पर आंदोलन की राजनीतिक स्वतंत्रता पर प्रश्न उठाते रहे हैं। दिपके का कहना है कि वे अब उस पार्टी से संबद्ध नहीं हैं और CJP को किसी स्थापित राजनीतिक दल का विस्तार नहीं, बल्कि युवाओं का स्वतंत्र मंच मानते हैं।

सौरव दास आंदोलन के मुख्य प्रवक्ता और बौद्धिक रूप से सबसे मुखर सदस्यों में हैं। उनकी पृष्ठभूमि खोजी पत्रकारिता, सूचना के अधिकार और न्यायपालिका की आलोचनात्मक पड़ताल से बनी है। उपलब्ध परिचयों के अनुसार उन्होंने लगभग 18 वर्ष की उम्र से ही सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन दाखिल करने शुरू कर दिए थे। इसके माध्यम से वे सरकारी दस्तावेजों, नियुक्तियों, नीतिगत निर्णयों और प्रशासनिक विसंगतियों की जानकारी प्राप्त करते रहे। बाद में उन्होंने कानूनी, न्यायिक और सामाजिक विषयों पर पेशेवर पत्रकारिता की। उनके लेख द वायर और द कारवां जैसे प्रकाशनों में प्रकाशित हुए। पूर्व प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ के न्यायिक कार्यकाल और निर्णयों पर उनका आलोचनात्मक लेख विशेष रूप से चर्चा में रहा। वे न्यायपालिका के सार्वजनिक आचरण, पारदर्शिता, संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही और सरकारी अभिलेखों तक नागरिकों की पहुँच जैसे विषयों पर लगातार लिखते रहे हैं। नवंबर 2025 में दिल्ली के वायु प्रदूषण के विरुद्ध हुए नागरिक प्रदर्शन में भी उनकी भागीदारी बताई गई है।

सौरव दास की पत्रकारिता और आरटीआई संबंधी पृष्ठभूमि ने उन्हें CJP के लिए स्वाभाविक मुख्य प्रवक्ता बनाया। वे उत्तेजक भाषणों की अपेक्षा दस्तावेजों, कानूनी प्रक्रियाओं और सरकारी वक्तव्यों की विसंगतियों के आधार पर अपनी बात रखने का प्रयास करते हैं। आंदोलन की फंडिंग, संगठनात्मक संरचना और राजनीतिक संबद्धता पर उठे प्रश्नों का उत्तर देने में वे सबसे आगे रहे। जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध दर्ज मामलों और सरकार से वार्ता की शर्तों पर संगठन का औपचारिक पक्ष प्रायः उन्होंने ही रखा। वे उन प्रतिनिधिमंडलों में भी शामिल रहे जिन्होंने केंद्रीय मंत्री जे. पी. नड्डा और सरकारी प्रतिनिधियों के सामने आंदोलन की माँगें रखीं। उनकी भूमिका मुख्यतः आंदोलन को वैधानिक, मीडिया-सम्मत और राजनीतिक रूप से स्पष्ट भाषा देना है।

आशुतोष रांका की पृष्ठभूमि कोर टीम के दूसरे सदस्यों से अलग है। वे जयपुर में पले-बढ़े और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर से शिक्षा प्राप्त की। IIT कानपुर में वे स्टूडेंट्स जिमखाना के अध्यक्ष रहे, इसलिए छात्र प्रतिनिधित्व, चुनाव, संस्थागत प्रशासन और सामूहिक निर्णय की प्रक्रिया से उनका परिचय विद्यार्थी जीवन में ही हो गया था। वे कॉलेज की नाट्य गतिविधियों में भी सक्रिय रहे। उच्च शिक्षा के बाद उन्होंने मैकिंजी एंड कंपनी में प्रबंधन सलाहकार के रूप में काम किया। उनके पेशेवर काम का दायरा स्वास्थ्य, सार्वजनिक क्षेत्र, निर्माण, रसायन, पर्यावरण और सतत विकास जैसे क्षेत्रों तक फैला रहा। 2019 से 2020 के बीच वे दिल्ली विधानसभा में एसोसिएट फेलो रहे। इसके बाद उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की। विदेश में रहते हुए वे स्वास्थ्य नीति और वैश्विक टीकाकरण से संबंधित संस्थाओं के लिए परामर्श कार्य से भी जुड़े।

रांका ने बाद में मैकिंजी में वरिष्ठ पद पर काम किया, लेकिन 2024 के बाद भारत लौटकर सामाजिक और राजनीतिक अभियानों में अधिक सक्रिय हो गए। उन्होंने राजस्थान में ‘परिवर्तन’ नामक नागरिक मंच बनाया, जिसका घोषित उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, शासन और राजनीतिक सुधारों पर लोगों को संगठित करना है। वे राजस्थान में नीट पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं की गड़बड़ियों और छात्र आत्महत्या से जुड़े मामलों पर सक्रिय रहे। दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी से उनके कार्यगत संबंधों की सूचना भी सार्वजनिक स्रोतों में मिलती है। इस पूर्व संबद्धता को लेकर राजनीतिक प्रश्न उठे हैं, पर CJP ने उन्हें स्वतंत्र नीति विशेषज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में प्रस्तुत किया है। जंतर-मंतर आंदोलन में रांका का काम सरकार से बातचीत, माँगों को स्पष्ट नीति प्रस्तावों में बदलने और समाचार चैनलों पर संगठन का पक्ष रखने का है। वे आक्रामक राजनीतिक वक्तव्य और तकनीकी नीति-भाषा, दोनों का प्रयोग करते हैं। सौरव दास के साथ उन्होंने सरकार के प्रतिनिधियों से हुई कई महत्त्वपूर्ण वार्ताओं में भाग लिया। अभिजीत दिपके जहाँ आंदोलन का भावनात्मक और प्रतीकात्मक चेहरा हैं, वहीं रांका उसे प्रशासनिक और वार्तात्मक क्षमता प्रदान करते हैं।

रतना सिंह पेशे से अधिवक्ता और पूर्व कानूनी पत्रकार हैं। उपलब्ध पेशेवर परिचय के अनुसार उन्होंने गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और उनका संबंध लखनऊ से भी रहा है। कानूनी पत्रकार के रूप में वे अदालतों, न्यायिक निर्णयों और विधिक प्रक्रियाओं की रिपोर्टिंग कर चुकी हैं। बाद में उन्होंने वकालत को अपना प्रमुख पेशा बनाया और उच्च न्यायालय में प्रैक्टिस करने लगीं। पत्रकारिता और वकालत के इस संयुक्त अनुभव ने उन्हें कानून की तकनीकी भाषा के साथ यह समझ भी दी कि किसी कानूनी विवाद को सार्वजनिक रूप से कैसे प्रस्तुत किया जाए। CJP ने उन्हें कानूनी और न्यायिक मामलों की प्रवक्ता बनाया। जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान उनकी भूमिका विशेष रूप से तब उभरी जब पुलिस कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने, कपड़े फाड़े जाने, महिला प्रदर्शनकारियों से कथित दुर्व्यवहार और अधिवक्ताओं को रोके जाने के आरोप सामने आए। उन्होंने दिल्ली के वकीलों से प्रदर्शनकारियों को कानूनी सहायता देने की अपील की। वे कोर टीम को यह सलाह देने वाली प्रमुख सदस्य हैं कि किस पुलिस कार्रवाई पर शिकायत, प्राथमिकी, न्यायिक याचिका या अन्य कानूनी उपाय अपनाया जाना चाहिए। उनकी उपस्थिति आंदोलन को कानूनी जोखिमों के प्रति सजग बनाती है। फिर भी उनके परिवार, आरंभिक जीवन और विस्तृत शैक्षणिक यात्रा के बारे में प्रामाणिक सार्वजनिक जानकारी सीमित है।

वैष्णवी गौर सार्वजनिक नीति की विशेषज्ञ और शोधकर्ता हैं। उन्होंने पब्लिक पॉलिसी में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की है। CJP की ओर से जारी परिचय के अनुसार उन्हें केंद्र और राज्य सरकारों, शैक्षणिक संस्थानों तथा नीति-निर्माण से जुड़े थिंक टैंकों के साथ काम करने का अनुभव है। हालाँकि उनके शैक्षणिक संस्थान और प्रत्येक पेशेवर नियुक्ति का विस्तृत विवरण अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराया गया है, लेकिन उनके वक्तव्यों से परीक्षा प्रशासन, सरकारी निर्णय प्रक्रिया और नीतियों के क्रियान्वयन की अच्छी समझ दिखाई देती है। उन्हें CJP में सरकारी नीतियों और सार्वजनिक मामलों की प्रवक्ता बनाया गया। वैष्णवी का योगदान आंदोलन की माँगों को केवल शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक सीमित न रखकर परीक्षा व्यवस्था में संस्थागत सुधारों से जोड़ना है। वे फास्ट ट्रैक अदालतों, जाँच की समय-सीमा, परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही, पीड़ित परिवारों को क्षतिपूर्ति और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध मुकदमों की वापसी जैसे प्रश्न उठाती रही हैं। सरकार के साथ वार्ता से पहले उन्होंने आंदोलन की माँगों को क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत किया। वे उस युवा नीति-विशेषज्ञ वर्ग का प्रतिनिधित्व करती हैं जो व्यवस्था के भीतर काम करने का अनुभव रखता है, लेकिन उसकी कमियों को सार्वजनिक रूप से चुनौती भी देना चाहता है।

आफरीन नवाज ने प्रबंधन की शिक्षा प्राप्त की है। वे एमबीए स्नातक, उद्यमी और अपने व्यावसायिक उपक्रम की संस्थापक हैं। इसके साथ ही वे सामाजिक आंदोलनों और नागरिक अभियानों में भी सक्रिय रही हैं। CJP के जंतर-मंतर आंदोलन से पहले उन्होंने बेंगलुरु में संगठन के प्रदर्शन और जनसम्पर्क गतिविधियों के समन्वय में भूमिका निभाई थी। उनकी विशेषता सार्वजनिक भाषण की अपेक्षा संगठन निर्माण, लोगों को जोड़ने और विभिन्न जिम्मेदारियों को टीमों में बाँटने में अधिक दिखाई देती है।

28 जून के जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले आफरीन ने प्रोटेस्ट कोऑर्डिनेशन कमेटी के गठन की घोषणा की। इस समिति में अलग-अलग राज्यों और सामाजिक पृष्ठभूमियों से आए स्वयंसेवकों को सम्मिलित किया गया। धरना स्थल पर भोजन, चिकित्सा सहायता, प्रवेश और निकास, मंच संचालन, भीड़ प्रबंधन, महिला प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा तथा बाहरी संगठनों से संपर्क जैसे काम किसी एक व्यक्ति द्वारा संचालित नहीं किए जा सकते। आफरीन की प्रबंधन संबंधी पृष्ठभूमि ऐसे कार्यों में उपयोगी हुई। उनके उद्यम का नाम, जन्मस्थान और शिक्षा संस्थान जैसे व्यक्तिगत विवरण अभी विश्वसनीय स्रोतों में विस्तार से उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए उनके संबंध में सोशल मीडिया पर प्रचलित अतिरिक्त दावों को सावधानी से देखने की आवश्यकता है।

दीपक बलियान राजनीति विज्ञान के शोधार्थी और किसान आंदोलनों से जुड़े जमीनी कार्यकर्ता हैं। CJP द्वारा जारी परिचय के अनुसार वे पिछले आठ वर्षों से किसान आंदोलनों और ग्रामीण प्रश्नों पर सक्रिय हैं। इसका अर्थ है कि उनका आंदोलनकारी अनुभव CJP की मई 2026 में हुई स्थापना से बहुत पहले का है। किसान आंदोलनों से जुड़ाव ने उन्हें धरना स्थल की अनुशासन व्यवस्था, गाँवों और छोटे नगरों से लोगों को जोड़ने, लंबी अवधि के प्रदर्शन को टिकाए रखने और सामाजिक संगठनों से संपर्क बनाए रखने का व्यावहारिक अनुभव दिया।

CJP में उन्हें किसानों और जमीनी प्रश्नों से संबंधित प्रवक्ता की भूमिका सौंपी गई। वे आंदोलन को महानगरीय सोशल मीडिया सक्रियता की सीमा से बाहर ले जाने वाले सदस्यों में हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेने वाले युवाओं का बड़ा हिस्सा ग्रामीण और निम्न-मध्यवर्गीय परिवारों से आता है। बलियान इस सामाजिक आधार को आंदोलन के भीतर अभिव्यक्ति देते हैं। जंतर-मंतर पर मुख्यधारा मीडिया के प्रति प्रदर्शनकारियों के आक्रोश के बीच उन्होंने बार-बार अपील की कि किसी पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार न किया जाए और असहमति के बावजूद मीडिया कर्मियों को अपना काम करने दिया जाए। यह भूमिका महत्त्वपूर्ण थी, क्योंकि आंदोलन का नेतृत्व मीडिया की आलोचना और पत्रकारों की शारीरिक सुरक्षा के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखना चाहता था।

कोर टीम की सबसे युवा सदस्य अमूल्य धवन हैं। वे अशोका विश्वविद्यालय में स्नातक स्तर की विद्यार्थी हैं। अलग-अलग सार्वजनिक परिचयों में उनके विषयों को राजनीति विज्ञान और समाजशास्त्र तथा कहीं राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र बताया गया है। इसलिए निश्चित रूप से इतना ही कहा जा सकता है कि उनका अध्ययन मुख्यतः राजनीति, समाज और सार्वजनिक नीति से संबंधित है। वे पंजाब विकास आयोग में नीति और शासन से जुड़ी इंटर्नशिप कर चुकी हैं। उनकी रुचि कानून, मीडिया, प्रशासन और सार्वजनिक नीति में है। वे लेखन भी करती हैं और आंदोलन में प्रारंभ से मीडिया स्वयंसेवक के रूप में सक्रिय रही हैं।

अमूल्य की विशेषता यह है कि वे आंदोलन का केवल बचाव नहीं करतीं, बल्कि उसकी आंतरिक कमजोरियों को भी स्वीकार करती हैं। इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित अपने लेख में उन्होंने लिखा कि CJP के भीतर वैचारिक मतभेद, असहमति, अपरिपक्वता और गलतियाँ मौजूद हैं। उन्होंने इन कमियों को छिपाने के बजाय सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने और संवाद के माध्यम से सुधारने की बात कही। उनके अनुसार आंदोलन किसी एक व्यक्ति की रचना नहीं, बल्कि लंबे समय से दबे युवा असंतोष को मिली एक साझा भाषा है। यह आत्मालोचनात्मक दृष्टि उन्हें CJP के भीतर विशिष्ट बनाती है। जहाँ कुछ सदस्य आंदोलन की रणनीति, कानून या संगठन संभालते हैं, वहीं अमूल्य उसके वैचारिक अर्थ को युवा पीढ़ी के अनुभवों से जोड़ती हैं।

इस कोर टीम को देखते हुए स्पष्ट होता है कि CJP किसी एक विश्वविद्यालय, विचारधारा, जाति, प्रदेश या पेशे से निकला संगठन नहीं है। दिपके इसके प्रतीक और डिजिटल रणनीतिकार हैं, सौरव दास दस्तावेज और पत्रकारिता की भाषा देते हैं, आशुतोष रांका नीति और वार्ता का पक्ष सँभालते हैं, रतना सिंह कानूनी सुरक्षा देखती हैं, वैष्णवी गौर माँगों को नीतिगत रूप देती हैं, आफरीन नवाज संगठनात्मक समन्वय करती हैं, दीपक बलियान जमीनी आंदोलनों का अनुभव लाते हैं और अमूल्य धवन आंदोलन की युवा तथा आत्मालोचनात्मक आवाज हैं।

नेहा बोरा और सोनम वांगचुक जैसे प्रमुख अनशनकारी इस आंदोलन के अत्यंत महत्त्वपूर्ण सार्वजनिक चेहरे रहे हैं, किंतु प्रकाशित आठ सदस्यीय कोर टीम का औपचारिक हिस्सा नहीं बताए गए हैं। इसी प्रकार विजेता दहिया प्रारंभिक प्रवक्ता-मंडल में थे, लेकिन वर्तमान कोर टीम की सूची में उनका नाम नहीं है। अतः CJP के समर्थकों, अनशनकारियों, प्रवक्ताओं और निर्णय लेने वाली कोर टीम के बीच अंतर बनाए रखना आवश्यक है।

(परदे के पीछे काम करने वाली कोर टीम के सदस्यों रतना सिंह, वैष्णवी गौर, आफरीन नवाज, दीपक बलियान और अमूल्य धवन की स्वतंत्र औपचारिक तस्वीरें अपेक्षाकृत उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए यहाँ नहीं दी जा सकीं हैं। )

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।