36 प्रतिशत से अधिक जल नमूनों में मिला तय सीमा से ज्यादा फ्लोराइड
पेयजल की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ाने वाली एक वैज्ञानिक स्टडी जून 2026 में शोध पत्रिका ACS ES&T Water में प्रकाशित हुई थी। अध्ययन के दौरान क्षेत्र के 315 भूजल नमूनों की जांच की गई। इनमें 36 प्रतिशत से अधिक नमूनों में फ्लोराइड की मात्रा 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर की निर्धारित सीमा से ज्यादा पाई गई। जांच में फ्लोराइड का स्तर 0.02 से 16.2 मिलीग्राम प्रति लीटर के बीच दर्ज किया गया, जबकि औसत मात्रा 1.68 मिलीग्राम प्रति लीटर थी।

अध्ययन में घड़बड़, खरिकाबाद, कालाझोर, शिवपुर, कालीपुर और सिंपथार गांवों को शामिल किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, इन गांवों में घड़बड़ में फ्लोराइड प्रदूषण का सूचकांक सबसे अधिक पाया गया।
छह गांवों की करीब 6 हजार आबादी को मिलेगा लाभ
जनगणना 2011 के आंकड़ों के अनुसार, इन छह गांवों की कुल आबादी 5,982 थी। हालांकि, वर्तमान आबादी इससे अलग हो सकती है। प्रस्तावित जल उपचार व्यवस्था का उद्देश्य प्रभावित गांवों के लोगों तक उपचारित और पीने योग्य पानी पहुंचाना है।
ग्रामीणों का कहना है कि चापाकल से पानी भरने के कुछ समय बाद बाल्टी और अन्य बर्तनों में पीली परत जमने लगती है। इससे पानी के इस्तेमाल में परेशानी होती है। पंचायत में आठ चापाकल लगाए जाने की जानकारी है, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार, इनमें से अधिकतर खराब पड़े हैं।
हालांकि, पानी में पीली परत जमना फ्लोराइड की अधिक मात्रा का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है। पानी की गुणवत्ता का पता लगाने के लिए प्रयोगशाला में जांच कराना जरूरी है।
एजेंसी चयन के बाद नियमित जलापूर्ति पर नजर
जिला योजना शाखा की ओर से केंद्रीयकृत जल उपचार संयंत्र और एकल वितरण केंद्र के संचालन के लिए एजेंसी चयन की निविदा जारी की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एजेंसी के अभाव में संयंत्र का संचालन प्रभावित था और ग्रामीणों को नियमित रूप से पानी नहीं मिल पा रहा था।
अब एजेंसी के चयन और संचालन संबंधी प्रक्रिया पूरी होने के बाद जलापूर्ति शुरू होने की स्थिति स्पष्ट होगी। इसके लिए संयंत्र का नियमित रखरखाव, पानी की गुणवत्ता की निगरानी और सभी छह गांवों तक वितरण व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी है।
पहले भी प्रभावित हुई थी ग्रामीण जलापूर्ति योजना
घड़बड़ पंचायत में फ्लोराइड प्रदूषण की समस्या पहले भी सामने आ चुकी है। दिसंबर 2023 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में क्षेत्र के भूजल में फ्लोराइड की अधिक मात्रा और पुरानी बहु-ग्रामीण जलापूर्ति योजना के क्रियान्वयन में आ रही समस्याओं का उल्लेख किया गया था।
बलियापुर मेगा ग्रामीण जलापूर्ति योजना के पहले चरण में दामोदर नदी के पानी को शीतलपुर, केसरिया मोड़ स्थित जल उपचार संयंत्र में साफ कर 41 गांवों तक पहुंचाने की योजना बनाई गई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पहले चरण की जलापूर्ति मई 2026 में दोबारा शुरू हुई थी। इससे पहले कर्मचारियों के वेतन बकाया रहने के कारण आपूर्ति बाधित हुई थी। उस समय पहले चरण के शेष गांवों में जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी थी।
ऐसे में घड़बड़ पंचायत के लिए प्रस्तावित व्यवस्था के साथ पुरानी जलापूर्ति योजना के समन्वय और सभी गांवों तक नियमित पानी पहुंचाने की स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी।
लंबे समय तक फ्लोराइड युक्त पानी पीने से स्वास्थ्य पर असर
विश्व स्वास्थ्य संगठन के पेयजल दिशानिर्देशों के अनुसार, फ्लोराइड की मार्गदर्शक सीमा 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर है। लंबे समय तक इससे अधिक मात्रा वाले पानी का सेवन दांतों और हड्डियों को प्रभावित कर सकता है। गंभीर मामलों में डेंटल फ्लोरोसिस और स्केलेटल फ्लोरोसिस जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
घड़बड़ पंचायत में सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सीधे ग्रामीणों के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है। अब लोगों की नजर एजेंसी चयन, उपचार संयंत्र के संचालन और नियमित जलापूर्ति शुरू होने पर टिकी है। योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि छहों गांवों के लोगों को लगातार जांचा हुआ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो पाता है या नहीं।


