पेयजल घोटाला, संतोष कुमार के बयान से खुला कमीशनखोरी का पूरा खेल

Archana Ekka
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Drinking Water Scam : पेयजल विभाग से जुड़े बहुचर्चित घोटाले में बड़ा खुलासा सामने आया है। इस मामले के मुख्य अभियुक्त माने जा रहे क्लर्क संतोष कुमार ने PMLA की धारा 50 के तहत दिए गए अपने बयान में विभाग के अंदर चल रही कमीशनखोरी की पूरी व्यवस्था को सामने रखा है।

संतोष के इस बयान के बाद जांच एजेंसियों की कार्रवाई और तेज हो गई है और कई बड़े अधिकारियों (Officials) की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

कमीशन सिस्टम की अंदरूनी कहानी

जांच के दौरान संतोष कुमार ने बताया कि पेयजल विभाग में Tender पास कराने के लिए पहले से ही कमीशन तय रहता था।

उसके अनुसार, किसी भी टेंडर की कुल राशि का करीब 10 प्रतिशत कमीशन लिया जाता था। इस कमीशन में मंत्री, सचिव, Engineer और अन्य अधिकारियों का हिस्सा तय था।

संतोष ने कहा कि यह पूरा सिस्टम ग्रामीण विकास विभाग में पहले सामने आए कमीशनखोरी के तरीके से काफी मिलता-जुलता है।

23 करोड़ की फर्जी निकासी का मामला

जांच एजेंसियों के अनुसार, संतोष कुमार के बैंक खाते का इस्तेमाल कर करीब 23 करोड़ रुपये की फर्जी निकासी की गई थी। इसके बाद ED ने संतोष का बयान दर्ज किया।

बयान में उसने बताया कि इस रकम में से 12 करोड़ रुपये नकद निकाले गए और अलग-अलग लोगों के बीच बांटे गए। इस बंटवारे का पूरा ब्योरा भी उसने जांच एजेंसियों को दिया है।

किसे कितना पैसा मिला

संतोष के बयान के मुताबिक, 12 करोड़ रुपये के बंटवारे में कई अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं।

इसमें प्रभात कुमार सिंह को 1.75 करोड़, चंद्रशेखर को 3 करोड़, राधेश्याम रवि को 1 करोड़, निरंजन कुमार को 80 लाख, परमानंद कुमार को 1 करोड़, सुनील कुमार सिन्हा को 85 लाख, सुरेंद्र पाल मिंज को 30 लाख, मनोज कुमार को 15 लाख, संजय कुमार को 10 लाख और रंजन कुमार सिंह को 7 लाख रुपये दिए गए।

विभागीय कार्रवाई और निलंबन

इस पूरे मामले की जांच वित्त विभाग ने भी कराई थी। जांच के बाद ट्रेजरी से जुड़े कुछ अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया।

वहीं, पेयजल विभाग ने DDO के रूप में काम कर रहे तत्कालीन कार्यपालक अभियंताओं के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की है।

जांच एजेंसियों की नजर में मुख्य अभियुक्त

पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय, दोनों ही जांच एजेंसियों ने संतोष कुमार को इस घोटाले का मुख्य अभियुक्त माना है। उसके बयान के आधार पर अब अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी गहराई से जांच की जा रही है।

जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, इस घोटाले से जुड़े और भी बड़े नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

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अर्चना एक्का को पत्रकारिता का दो वर्ष का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इंटर्नशिप से की। इस दौरान उन्होंने झारखंड उजाला, सनमार्ग और इम्पैक्ट नेक्सस जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में उन्होंने रिपोर्टर, एंकर और कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़ रिपोर्टिंग, एंकरिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव प्राप्त किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में वह सक्रिय रूप से काम करते हुए अपने अनुभव को लगातार आगे बढ़ा रही हैं।