रांची: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए झारखण्ड के राज्यपाल-सह-कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने सफलता प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने बताया कि इस वर्ष उपाधि और पदक प्राप्त करने वाले कुल 142 स्वर्ण पदक विजेताओं में से 93 छात्राएं हैं, जो बदलते और सशक्त होते भारत का एक प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि आज हमारी बेटियां शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, चिकित्सा, प्रशासन और खेल सहित हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं।

राज्यपाल ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के दूरदर्शी विचारों और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को याद करते हुए विद्यार्थियों से कहा कि ऐसे महान शिक्षाविद और राष्ट्रसेवी के नाम से जुड़े संस्थान का हिस्सा होना अत्यंत गौरव की बात है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने आचरण, कर्तव्यनिष्ठा और विवेक से विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को हमेशा ऊंचाइयों पर बनाए रखने का आह्वान किया।
समारोह के दौरान भारतीय ज्ञान-परंपरा और “विद्या ददाति विनयम्” के जीवन-मूल्य पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि ज्ञान सिर्फ सूचनाओं का संग्रह नहीं है, बल्कि यह संवाद, तर्क और सत्य की निरंतर खोज का मार्ग है। वर्तमान डिजिटल युग का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने युवाओं को सलाह दी कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल तकनीक और बायोटेक्नोलॉजी जैसी आधुनिक तकनीकों का केवल उपभोग न करें, बल्कि नैतिक दायित्वों और मानवीय संवेदनाओं को ध्यान में रखते हुए इनके रचनात्मक विकास में अपना योगदान दें।
राज्यपाल गंगवार ने युवाओं को केवल नौकरी तलाशने तक सीमित न रहकर नवाचार और उद्यमिता के जरिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने (जॉब क्रिएटर बनने) के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ‘विकसित भारत@2047’ के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है और आज विश्वविद्यालयों से निकल रहे यही युवा वर्ष 2047 के भारत के मुख्य शिल्पकार होंगे।


