रांची: केंद्र सरकार द्वारा लाए गए खनिज अधिकार संशोधन विधेयक (खनिज विधेयक) का पुरजोर विरोध करने के लिए झारखंड सरकार ने आगामी पांच और छह अक्टूबर को विधानसभा का दो दिवसीय विशेष सत्र आमंत्रित किया है। राज्य के संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर के अनुसार केंद्र सरकार के इस नए संशोधन से राज्यों का खनिजों पर सेस (कर) लगाने का अधिकार समाप्त हो जाएगा, जिससे झारखंड जैसे खनिज समृद्ध राज्य को भारी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ेगा। राज्य सरकार का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा अगस्त 2024 में राज्यों को खनिजों पर सेस लगाने की अनुमति दिए जाने के बाद केंद्र का यह फैसला संघीय व्यवस्था पर कुठाराघात है। विशेष सत्र में सर्वसम्मति से इस विधेयक के विरोध में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।

इस पूरे मामले पर रणनीति तय करने के लिए आगामी 25 सितंबर को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट की अहम बैठक बुलाई गई है, जिसमें संशोधित खनिज विधेयक को चुनौती देने से संबंधित प्रस्ताव लाया जाएगा। उल्लेखनीय है कि झारखंड सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में खनिजों पर सेस लगाकर लगभग 14 हजार करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने का अनुमान लगाया था, जिसमें से 31 अगस्त तक 4,700 करोड़ रुपये से अधिक की राशि एकत्रित भी की जा चुकी है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सेस वसूलने की तैयारी में जुटी राज्य सरकार अब कानूनी और विधायी दोनों मोर्चों पर केंद्र के इस कदम का मुकाबला करने के लिए अपनी भावी रूपरेखा तैयार कर रही है।


