भारी उद्योग मंत्रालय ने एचईसी को आर्थिक सहायता देने से इनकार कर दिया, जानें अब क्या होगा

एचईसी की आर्थिक मुश्किलें और गहरी हो गई हैं। केंद्र ने फिलहाल वित्तीय सहायता से इनकार किया है, जबकि कर्मचारियों के वेतन और सेवानिवृत्त कर्मियों के बकाये का भुगतान अटका हुआ है।

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रांची: आर्थिक संकट से जूझ रही हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (एचईसी) की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। भारी उद्योग मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि एचईसी को फिलहाल कोई वित्तीय मदद नहीं मिलेगी। मंत्रालय ने 22 जुलाई को पत्र भेजकर प्रबंधन को निर्देश दिया है कि वह अपने स्तर पर कार्यशील पूंजी की व्यवस्था करे और कर्मचारियों के लंबित वेतन तथा सेवानिवृत्त कर्मियों के बकाये का भुगतान करे। इसके बाद एचईसी प्रबंधन ने 27 जुलाई को मजदूर यूनियनों को पत्र जारी कर आर्थिक तंगी की बात कही और फिलहाल भुगतान करने में असमर्थता व्यक्त की। प्रबंधन का तर्क है कि कंपनी की वित्तीय स्थिति में सुधार और उत्पादन बढ़ने के बाद ही बकाया राशि दी जा सकेगी।

दूसरी ओर हटिया मजदूर यूनियन के अनुसार कर्मचारियों का करीब 34 महीने का वेतन बकाया है। इसके अलावा जून 2018 से सेवानिवृत्त कर्मचारियों के देयकों और अप्रैल 2017 से लीव सैलरी का भुगतान भी अटका हुआ है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि जरूरत पड़ी तो वे अदालत का रुख करेंगे और आंदोलन भी तेज करेंगे। वहीं एचईसी नगर प्रशासन विभाग ने आवासीय परिसर के क्वार्टरों पर अवैध कब्जा करने वाले लोगों को 15 दिनों के भीतर क्वार्टर खाली करने का नोटिस देना शुरू कर दिया है, अन्यथा उनसे जुर्माना वसूलने और जबरन कब्जा हटाने की कार्रवाई की जाएगी।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।