नियमित जमानत पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, नवीन केडिया को नहीं मिली राहत

Archana Ekka
3 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

Naveen Kedia did not Get Relief : झारखंड हाईकोर्ट ने शराब घोटाले (Liquor Scam) से जुड़े एक अहम मामले में नियमित जमानत को लेकर सख्त रुख अपनाया है।

छत्तीसगढ़ के शराब कारोबारी Naveen Kedia की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत के लिए आरोपी का न्यायिक हिरासत में होना जरूरी है।

इसी आधार पर हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया।

गोवा से गिरफ्तारी और अंतरिम जमानत

अदालत के अनुसार, नवीन केडिया को 7 जनवरी 2026 को गोवा से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद 9 जनवरी 2026 को गोवा की अदालत ने उन्हें चार दिनों की अंतरिम जमानत दी थी।

अंतरिम जमानत की शर्तों में यह साफ लिखा था कि 12 जनवरी 2026 तक उन्हें रांची स्थित एसीबी के सामने आत्मसमर्पण करना होगा, ताकि आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा सके।

शर्तों का पालन नहीं किया

कोर्ट में यह बात सामने आई कि नवीन केडिया ने न तो एसीबी के सामने आत्मसमर्पण किया और न ही झारखंड की अदालत में खुद उपस्थित होकर जमानत याचिका दायर की।

इसके बजाय उन्होंने video conferencing के जरिए पेश होने की अनुमति मांगी।

हालांकि, अदालत ने झारखंड हाईकोर्ट वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियम, 2025 का हवाला देते हुए इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया, क्योंकि पहली पेशी में आरोपी की शारीरिक उपस्थिति अनिवार्य होती है।

हाईकोर्ट की कानूनी व्याख्या

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि धारा 439 सीआरपीसी (अब धारा 483 बीएनएसएस) के तहत नियमित जमानत तभी दी जा सकती है, जब आरोपी न्यायिक हिरासत में हो या उसने अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण किया हो।

यदि आरोपी अंतरिम जमानत पर रहते हुए अदालत या जांच एजेंसी के निर्देशों का पालन नहीं करता, तो उसे न्यायिक हिरासत में माना नहीं जा सकता। ऐसा व्यवहार कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग माना जाएगा।

साफ संदेश

अदालत की टिप्पणी से यह साफ हो गया है कि नियमित जमानत के लिए कानून का पालन जरूरी है।

आरोपी अगर जांच एजेंसी या अदालत के आदेशों की अनदेखी करता है, तो उसे राहत नहीं दी जा सकती। इस फैसले के बाद अब नवीन केडिया की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

कुल मिलाकर, High Court के इस फैसले को कानून के पालन और न्यायिक प्रक्रिया की सख्ती के रूप में देखा जा रहा है, जिससे भविष्य में ऐसे मामलों में एक स्पष्ट संदेश जाता है।

Share This Article
अर्चना एक्का को पत्रकारिता का दो वर्ष का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इंटर्नशिप से की। इस दौरान उन्होंने झारखंड उजाला, सनमार्ग और इम्पैक्ट नेक्सस जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में उन्होंने रिपोर्टर, एंकर और कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़ रिपोर्टिंग, एंकरिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव प्राप्त किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में वह सक्रिय रूप से काम करते हुए अपने अनुभव को लगातार आगे बढ़ा रही हैं।