Historic moment in Motihari : बिहार के मोतिहारी जिले के कथवलिया क्षेत्र में बन रहे विराट रामायण मंदिर में शनिवार को एक ऐतिहासिक कार्य पूरा हुआ।

यहां विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग (Shivalinga) पूरे वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ स्थापित किया गया। इस खास मौके पर मंदिर परिसर भक्तों से भर गया और चारों तरफ श्रद्धा और उत्साह का माहौल देखने को मिला।
भव्य आयोजन में शामिल हुए राज्य के बड़े नेता
शिवलिंग स्थापना कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा मौजूद रहे। सभी नेताओं ने मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना की और निर्माण कार्य की प्रगति की जानकारी ली।
मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने कहा कि इस मंदिर के बनने से पूरे क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिलेगी और यह धार्मिक के साथ-साथ पर्यटन की दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण होगा।
क्रेन और हेलीकॉप्टर से हुआ भव्य शिवलिंग का स्वागत
इतने विशाल शिवलिंग को स्थापित करना आसान काम नहीं था। इसे उठाने और सही जगह पर रखने के लिए दो बड़ी क्रेनों का इस्तेमाल किया गया।
जैसे ही शिवलिंग को मंदिर में स्थापित किया गया, गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़ों और मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। इस अवसर पर हेलीकॉप्टर से शिवलिंग पर फूलों की वर्षा भी की गई, जिसे देखकर श्रद्धालु भावुक हो उठे।
तमिलनाडु से चंपारण तक की लंबी यात्रा
यह विशाल शिवलिंग Tamil Nadu के महाबलीपुरम से बनकर आया है। इसे ब्लैक ग्रेनाइट पत्थर से तैयार किया गया है। शिवलिंग की लंबाई करीब 33 फीट है और इसका वजन लगभग 210 टन बताया गया है।
इस शिवलिंग को महाबलीपुरम से चंपारण लाने में करीब 45 दिन लगे, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
2030 तक पूरा होगा मंदिर का सपना
शिवलिंग स्थापना के दौरान महावीर मंदिर न्यास के सचिव शायन कुणाल और उनकी पत्नी, सांसद शांभवी चौधरी ने जजमान की भूमिका निभाई।
शायन कुणाल ने बताया कि विराट रामायण मंदिर उनके पिता का सपना था, जो अब धीरे-धीरे साकार हो रहा है।
उन्होंने कहा कि मंदिर का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और उम्मीद है कि साल 2030 तक यह भव्य मंदिर पूरी तरह तैयार हो जाएगा।
श्रद्धा और विकास का नया केंद्र बनेगा मंदिर
विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना के बाद यह माना जा रहा है कि विराट रामायण मंदिर (Virat Ramayan Temple) आने वाले समय में देश-विदेश से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करेगा।
इससे न सिर्फ धार्मिक महत्व बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार और विकास के नए अवसर भी मिलेंगे।


