आईआईटी मुंबई प्रशासन तीन महीने से मेरे बेटे को कर रहा था प्रताड़ित : सोनाली वाकोडे

आईआईटी मुंबई के छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या मामले में उनकी मां ने जातिगत भेदभाव के आरोप लगाते हुए न्याय की मांग की है। संस्थान ने आरोपों पर अपना पक्ष रखा।

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मुंबई : आईआईटी मुंबई के छात्रावास में आत्महत्या करने वाले बीटेक के साहिल वाकोडे की मां सोनाली वाकोडे ने मीडिया के समक्ष बेहद भावुक और गंभीर बयान जारी किया। उन्होंने अपने बेटे के लिए न्याय की मांग करते हुए संस्थान में जातिगत भेदभाव के आरोप लगाए। सोनाली वाकोडे ने दावा किया कि उनके बेटे साहिल ने उन्हें बताया था कि कालेज में उसके साथ जाति के आधार पर कथित तौर पर दुर्व्यवहार और उसका अपमान किया जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि एक प्रोफेसर उसे बार-बार निचली जाति का हवाला देकर प्रताड़ित कर रहे थे और यह स्थिति पिछले तीन महीनों से चल रही थी।

सोनाली ने कहा कि उन्हें भारत के संविधान और क्राइम ब्रांच की जांच पर पूरा भरोसा है कि उनके बेटे को न्याय जरूर मिलेगा। इसके साथ ही परिवार ने आईआईटी मुंबई के निदेशक और संबंधित प्रोफेसर की गिरफ्तारी की मांग की है। एक शिक्षिका और मां के तौर पर अपना दर्द व्यक्त करते हुए उन्होंने हाथ जोड़कर समाज से अपील की कि साहिल को अपना बच्चा समझकर उसे न्याय दिलाएं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आईआईटी मुंबई के इतिहास को देखा जाए कि आखिर वहां इतनी बड़ी संख्या में दलित छात्र आत्महत्या क्यों कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि साहिल को परेशान किए जाने की बात पता चलने पर भी उन्होंने उसे पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने और ऐसी बातों को नजरअंदाज करने के लिए कहा था। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा, “शायद वह हमारी गलती थी। अगर हम उस दिन उसे अपने साथ वापस ले आते, तो आज मेरा बच्चा जिंदा होता।”

आईआईटी मुंबई फैकल्टी फोरम के अध्यक्ष डा. राजकुमार पंत ने डीन सूर्यनारायण दुल्ला पर लगाए गए आरोपों पर संस्थान का पक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि साहिल ने पिछले तीन-चार महीनों के दौरान संस्थान के एससी-एसटी सेल में किसी तरह की शिकायत नहीं की थी। उनके अनुसार, दुल्ला छात्रों के प्रति सहयोगी रवैये के लिए जाने जाते हैं और प्रशासनिक पद पर रहते हुए नियमों के उल्लंघन के मामलों में कार्रवाई करना उनकी जिम्मेदारी थी। डॉ. पंत ने यह भी कहा कि यदि किसी छात्र द्वारा परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल किया जाता है तो संस्थान के लिए उस पर कार्रवाई करना जरूरी है। नकल या परीक्षा नियमों के उल्लंघन को नजरअंदाज करना उन छात्रों के साथ अन्याय होगा, जो नियमों का पालन करते हुए परीक्षा देते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि डीन के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है और अब कानून अपना काम करेगा।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।