नयी दिल्ली: ‘इंडिया’ गठबंधन के नेता और कार्यकर्ता रविवार को दिल्ली में ‘वोट चोरी’ और चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के खिलाफ मार्च निकालेंगे और फिर ऐतिहासिक रामलीला मैदान में रैली होगी।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर एकत्र होने के बाद विपक्षी नेता खुले वाहनों में सवार होकर कनॉट प्लेस पहुंचे, जहां से मार्च शुरू होगा। मार्च रामलीला मैदान तक जाएगा, जहां गठबंधन के नेता रैली को संबोधित करेंगे।

इस रैली के जरिये विपक्षी दल मोदी सरकार पर निशाना साधेंगे और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाएंगे।
यह कार्यक्रम शनिवार को खरगे के आवास पर आयोजित प्रतीकात्मक ‘जन महाभियोग’ की कार्यवाही के एक दिन बाद हो रहा है। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार की अध्यक्षता में हुई इस कार्यवाही में खरगे ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ विपक्ष के आरोपों से जुड़ा प्रस्ताव पेश किया, जिसे चर्चा के बाद पारित कर दिया गया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कार्यवाही के समापन पर भाषण दिया।
विभिन्न राज्यों से विपक्षी दलों के नेता और समर्थक शनिवार को ही राजधानी पहुंचने लगे थे। गठबंधन ने छात्रों, युवाओं, महिलाओं, श्रमिकों और नागरिक समाज के सदस्यों से मार्च और रैली में शामिल होने की अपील की है। कुछ छात्र संगठनों ने भी कार्यक्रम को समर्थन दिया है।
रामलीला मैदान में रैली में सुबह से लोग पहुंचने लगे थे। वरिष्ठ विपक्षी नेताओं के लिए बनाए गए मुख्य मंच पर विशाल तिरंगामयी शामियाना लगाया गया है, जबकि गठबंधन की प्रदेश इकाइयों के प्रतिनिधियों के लिए अलग मंच तैयार किया गया है।
‘इंडिया’ गठबंधन के नेताओं ने रैली में 10 लाख तक लोगों के पहुंचने की उम्मीद जताई है, जबकि दिल्ली पुलिस का अनुमान करीब 50 हजार लोगों के जुटने का है।
सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की कंपनियों के साथ 4,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। रामलीला मैदान को 14 जोन में बांटा गया है। इसके अलावा 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिये निगरानी की जा रही है।
रैली के मद्देनजर रविवार को सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक दिल्ली के कई हिस्सों में यातायात संबंधी पाबंदियां लागू हैं।
‘इंडिया’ गठबंधन मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर निर्वाचन आयोग के खिलाफ लगातार
प्रदर्शन कर रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इन प्रक्रियाओं के कारण मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। निर्वाचन आयोग इन आरोपों को खारिज करता रहा है।


