
Cannabis Law : भारत में कैनाबिस (गांजा) से जुड़े कानूनों को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा केंद्र सरकार को इस विषय पर व्यापक समीक्षा करने और नीतिगत निर्णय लेने के लिए दिए गए छह महीने के समय की अवधि अब समाप्ति के करीब पहुंच रही है। ऐसे में यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या देश में कैनाबिस से जुड़े मौजूदा कानूनों में बदलाव किया जाएगा या वर्तमान व्यवस्था को ही बरकरार रखा जाएगा।
यह मामला तब चर्चा में आया जब एक सामाजिक संगठन ने अदालत में याचिका दायर कर कैनाबिस को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और इसके संबंध में मौजूदा कानूनों की समीक्षा की मांग की। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि दुनिया के कई देशों में वैज्ञानिक शोध, चिकित्सा उपयोग और औद्योगिक संभावनाओं को देखते हुए कैनाबिस नीति में बदलाव किए गए हैं, इसलिए भारत में भी इस विषय पर गंभीर विचार होना चाहिए।
दिल्ली हाई कोर्ट ने जनवरी 2026 में सुनवाई के दौरान कैनाबिस को वैध या अवैध घोषित करने पर कोई सीधा फैसला नहीं दिया, लेकिन केंद्र सरकार को विभिन्न हितधारकों से परामर्श कर कानूनों की समीक्षा करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि यदि जरूरत महसूस हो तो नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस (NDPS) अधिनियम के प्रावधानों में संशोधन पर भी विचार किया जा सकता है।
केंद्र सरकार का पक्ष है कि भारत में कैनाबिस पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। चिकित्सा, वैज्ञानिक अनुसंधान, औद्योगिक उपयोग और बागवानी जैसे नियंत्रित उद्देश्यों के लिए इसके उपयोग की अनुमति पहले से मौजूद है। कई राज्यों में औद्योगिक हेम्प की खेती को भी सीमित स्तर पर मंजूरी दी जा चुकी है। उत्तराखंड इस दिशा में पहल करने वाला पहला राज्य रहा है, जबकि अन्य राज्य भी इसी प्रकार की योजनाओं पर विचार कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि कैनाबिस से जुड़े कानूनों पर पुनर्विचार की मांग के पीछे चिकित्सा उपयोग, औद्योगिक उत्पादन और वैश्विक नीतिगत बदलाव प्रमुख कारण हैं। दूसरी ओर, स्वास्थ्य विशेषज्ञ और कानून प्रवर्तन एजेंसियां इसके दुरुपयोग, नशे की लत और अवैध तस्करी से जुड़े जोखिमों को लेकर चिंता जता रही हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में लाखों लोग किसी न किसी रूप में कैनाबिस उत्पादों का उपयोग करते हैं। इसके साथ ही अवैध तस्करी और खेती के मामले भी लगातार सामने आते रहे हैं। यही कारण है कि नीति निर्माण के दौरान स्वास्थ्य, कानून-व्यवस्था, आर्थिक संभावनाओं और सामाजिक प्रभावों के बीच संतुलन बनाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
अब सभी की नजर केंद्र सरकार के आगामी निर्णय पर टिकी है। यदि समीक्षा के बाद किसी प्रकार का बदलाव प्रस्तावित होता है तो भारत में कैनाबिस नीति को लेकर एक नई बहस और व्यापक सुधारों की संभावना जन्म ले सकती है।

