
नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि हाल ही में आयोजित ‘एआई इम्पैक्ट’ शिखर सम्मेलन में पूरी दुनिया ने भारत की क्षमता की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि इससे साफ है कि टेक्नोलॉजी को लेकर भारत के युवाओं की सोच आने वाले समय में मानवता के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी। पिछले सप्ताह नई दिल्ली में आयोजित इस बड़े सम्मेलन का समापन ‘एआई इम्पैक्ट’ पर नई दिल्ली घोषणा पत्र को अपनाने के साथ हुआ। इसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि दिल्ली में हुए इस ऐतिहासिक एआई शिखर सम्मेलन में दुनिया भर ने भारत की ताकत को सराहा। उन्होंने कहा कि यह हमारे युवाओं की दूरदर्शी सोच का प्रमाण है, जो तकनीक के जरिए पूरी मानवता के काम आ सकती है। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ के घोषणापत्र पर 89 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने हस्ताक्षर किए। यह इस बात का संकेत है कि आर्थिक विकास और सामाजिक भलाई के लिए एआई के उपयोग पर व्यापक वैश्विक सहमति बन रही है। सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा और स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गी पॉहमेलॉ सहित कई देशों के नेता और दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों के सीईओ शामिल हुए।
इसके अलावा श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके, भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे, मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम, क्रोएशिया के प्रधानमंत्री आंद्रेई प्लेनकोविक, सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक, सेशेल्स के उपराष्ट्रपति सेबेस्टियन पिल्लै, एस्टोनिया के राष्ट्रपति अलार कारिस और फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो भी कार्यक्रम का हिस्सा बने।
‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की थीम पर आधारित इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य भारत को एआई के क्षेत्र में अग्रणी देशों की कतार में खड़ा करना था। सम्मेलन में ऐसे भविष्य की परिकल्पना की गई, जहां एआई मानवता को आगे बढ़ाए, समावेशी विकास को बढ़ावा दे और पृथ्वी के हितों की रक्षा में अहम भूमिका निभाए।

