


रांची: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक मामले की जांच अब और तेज हो गई है। JPSC परीक्षा में गड़बड़ी की जांच कर रही ईडी ने झारखंड CGL पेपर लीक से जुड़े दोनों बड़े मामलों में ECIR दर्ज कर ली है। इसके साथ ही एजेंसी ने पूरे मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू कर दी है। ईडी की इस कार्रवाई के बाद मामले से जुड़े संदिग्धों और कथित बिचौलियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ईडी ने साल 2024 में ही नामकुम थाने में दर्ज मामले के आधार पर प्राथमिक जांच शुरू कर दी थी। लेकिन सीआडी की ओर से दर्ज नए केस में पेपर लीक से जुड़े ठोस सबूत सामने आने के बाद एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग का नया मामला दर्ज कर लिया।





ईडी अब सीआईडी की जांच डायरी और मामले में जुटाए गए तकनीकी साक्ष्यों को अपने कब्जे में लेगी। सीआईडी की जांच के दायरे में आए सभी संदिग्धों की भूमिका भी बारीकी से खंगाली जाएगी। जांच का मकसद यह पता लगाना है कि पेपर लीक के बदले हासिल किया गया कथित काला धन कहां से आया और उसे कहां-कहां इस्तेमाल या निवेश किया गया।
अभय तिवारी पर बढ़ा शिकंजा, दोनों मामलों में आरोपी
CGL परीक्षा को लेकर पहला मामला नामकुम थाने में मधुमिता कुमार के बयान पर अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया था। जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस ने अभय तिवारी का नाम मामले में जोड़ा और उसे मुख्य आरोपी बनाया। बताया जा रहा है कि दोनों मामलों में सामने आए संदिग्धों की भूमिका आपस में जुड़ी हुई है। इसी वजह से अब ED की जांच के केंद्र में अभय तिवारी और उससे जुड़े नेटवर्क की भूमिका भी आ गई है।
पुलिस मुख्यालय और सीआईडी से मांगे जाएंगे दस्तावेज
इस मामले में ईडी ने पहले राज्य पुलिस मुख्यालय से कई अहम जानकारियां मांगी थीं। हालांकि, उस समय एजेंसी को जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए थे। अब ईडी दोनों मामलों में नए सिरे से कार्रवाई की तैयारी में है। एजेंसी जल्द ही सीआईडी और पुलिस मुख्यालय को आधिकारिक पत्र भेजकर केस डायरी, बैंक खातों से जुड़ी जानकारी और आरोपियों के बयानों की प्रतियां मांगेगी। इन दस्तावेजों की जांच के बाद मामले में छापेमारी और पूछताछ का नया दौर शुरू होने की संभावना है।
