
रवीश कुमार
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता के सवाल को राज्य सरकार ने हल्के में लिया है।हेमंत सरकार को (जिसमें कांग्रेस भी सहयोगी है) हर दिन इस पर ध्यान देना चाहिए था और ठीक करना चाहिए था। राज्य कोई हो, सरकार किसी की हो, पार्टी किसी की हो, युवाओं को इससे समझौता नहीं करना चाहिए। कितने साल तक परीक्षाओं की धांधली चलेगी। बंद होना होगा। वहां जो छात्र आंदोलन कर रहे हैं, सरकार को गंभीरता से लेना चाहिए। हर राज्य में युवाओं के भविष्य को बर्बाद करने का इंतज़ाम किया गया है। परीक्षा के बाद छात्रों को शिक्षा की क्वालिटी के सवाल पर लौटना होगा और उसे लेकर आवाज़ उठानी होगी। जब वे कॉलेजों का हाल देखेंगे तब समझ आएगा कि इस बदलती दुनिया के लिए उन्हें तैयार ही नहीं किया जा रहा। पढ़ाई का स्तर ज़िलों में बहुत घटिया है। मुख्यमंत्री को झारखंड लोक सेवा आयोग के हर सदस्य को बर्खास्त कर देना चाहिए या फिर सबको बुला कर आख़िरी बार के लिए पूछना चाहिए कि आप लोगों से होगा या नहीं। इस आयोग के एक एक कर्मचारी की संपत्ति की जाँच होनी चाहिए। परीक्षा में भरोसा पैदा करना पड़ेगा। हिन्दी प्रदेश को में संभावनाएं ख़त्म कर दी गई हैं। यह लड़ाई लंबी है और सियासी दलों से आगे की है। राज्य का सुख केवल वे उद्योगपति भोग रहे हैं जिन्हें पुल से लेकर खदान का ठेका मिलता है। जनता केवल कष्ट भुगतेगी कैसे चलेगा। लड़ो और जीतो।
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

