रांची: झारखंड के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने और चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य में वर्ष 1990 से 2023 के बीच नियुक्त ऐसे 631 डॉक्टरों को चिह्नित किया गया है, जो या तो नियुक्ति के बाद अपने कार्यस्थल पर योगदान देने पहुंचे ही नहीं या फिर सालों से बिना किसी सूचना के अनुपस्थित चल रहे हैं। विभाग अब इन सभी डॉक्टरों की समीक्षा कर उन्हें नियमानुसार सेवामुक्त करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर रहा है।

स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार, लंबे समय से गायब डॉक्टरों में सबसे अधिक संख्या वर्ष 2009 में नियुक्त चिकित्सकों की है, जिनकी संख्या 308 है। इसके अलावा वर्ष 2015 के 124, वर्ष 2012 के 65, वर्ष 2013 के 38, वर्ष 2020 के 37, वर्ष 2021 के 17, वर्ष 2023 के 16, वर्ष 2000 के 7 और वर्ष 1990 में नियुक्त 2 डॉक्टर अब तक अपने निर्धारित कार्यस्थल से नदारद पाए गए हैं।
गौरतलब है कि विभागीय स्तर पर डॉक्टरों की अनुपस्थिति को लेकर ऐसी सख्त कार्रवाई पहले भी की जा चुकी है। इससे पूर्व वर्ष 2025 में भी जेपीएससी (JPSC) के माध्यम से बहाल हुए 86 मेडिकल ऑफिसर और 57 स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को कार्यस्थल पर योगदान न देने के कारण बर्खास्त किया जा चुका है।
विभाग की इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य सरकारी अस्पतालों में रिक्त पड़े पदों को स्पष्ट करना और मरीजों को बिना किसी बाधा के स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। इन अनुपस्थित डॉक्टरों की सेवा समाप्त होने के बाद खाली हुए पदों पर झारखंड लोक सेवा आयोग के जरिए नई भर्तियों की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिससे ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को दूर किया जा सके।
मामले पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने स्पष्ट किया है कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही या बिना किसी उचित कारण के कार्यस्थल से गायब रहना बेहद गंभीर विषय है। सरकार राज्य के हर नागरिक को समय पर इलाज की सुविधा देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसलिए अनुपस्थित डॉक्टरों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए खाली पदों पर नई नियुक्तियां की जाएंगी ताकि आम जनता को स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए परेशान न होना पड़े।


