झारखंड में मातृ मृत्यु अनुपात राष्ट्रीय औसत से कम, शिशु मृत्यु दर और प्रजनन दर अब भी चुनौती

झारखंड ने मातृ मृत्यु और पूर्ण टीकाकरण में राष्ट्रीय औसत को पीछे छोड़ा, लेकिन शिशु मृत्यु दर, पांच साल से कम उम्र की मौतें और चिकित्सकों की कमी बड़ी चुनौती हैं।

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रांची: स्वास्थ्य सेवाओं में हो रहे व्यापक सुधार के चलते झारखंड ने विभिन्न स्वास्थ्य संकेतकों में राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन किया है। विशेष रूप से मातृ मृत्यु अनुपात में झारखंड का आंकड़ा 82 पर आ गया है, जो कि राष्ट्रीय औसत 87 से 5 अंक बेहतर है। इसके अलावा पूर्ण टीकाकरण के मामले में भी राज्य 87.6 प्रतिशत (NFHS-6) के साथ राष्ट्रीय औसत (87.1 प्रतिशत) से 0.5 प्रतिशत अंक आगे निकल गया है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशन में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था तेजी से सुधर रही है और जल्द ही ‘झारखंड मॉडल’ देश के सामने आएगा।

हालांकि, इन सकारात्मक आंकड़ों के बावजूद चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे राज्य के सामने शिशु मृत्यु दर और संस्थागत प्रसव जैसे मोर्चों पर बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। बीते सप्ताह स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह द्वारा की गई एनएचएम की समीक्षा में सामने आए SRS 2026 के आंकड़ों के अनुसार, झारखंड की कुल प्रजनन दर 2.2 है, जो राष्ट्रीय स्तर (1.9) से अधिक है। वहीं राज्य में जन्म के समय जीवन प्रत्याशा 69.5 वर्ष है, जो भारत के औसत (71.6 वर्ष) से कम है। इसके अतिरिक्त, राज्य में शिशु मृत्यु दर प्रति हजार जीवित जन्म 27 (राष्ट्रीय औसत 24) और पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर 32 (राष्ट्रीय औसत 27) दर्ज की गई है। इन आंकड़ों पर चिंता जताते हुए अपर मुख्य सचिव ने सुधार के लिए ठोस योजनाएं बनाने का निर्देश दिया है।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।