हाईकोर्ट ने रद्द किया सजा पुनरीक्षण बोर्ड का आदेश, 26 साल से जेल में बंद अनिल शर्मा की रिहाई पर फिर से होगा विचार

झारखंड हाईकोर्ट ने अनिल शर्मा की समयपूर्व रिहाई खारिज करने वाला बोर्ड का आदेश रद्द कर दिया। अदालत ने विस्तृत कारणों के साथ दोबारा विचार करने का निर्देश दिया।

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रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा काट रहे अनिल शर्मा की समय पूर्व रिहाई की मांग खारिज करने वाले राज्य सजा पुनरीक्षण बोर्ड के आदेश को रद्द कर दिया है। जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय की अदालत ने 25 मार्च 2026 की अधिसूचना को निरस्त करते हुए मामले को दोबारा विचार करने के लिए बोर्ड के पास वापस भेज दिया है। साथ ही, अदालत ने विस्तृत कारणों के साथ नया आदेश पारित करने का निर्देश दिया है।

बोर्ड के आदेश पर अदालत के सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि बोर्ड ने रिहाई खारिज करने के अपने आदेशों में लगभग एक जैसे कारणों को ही दोहराया है। बोर्ड ने यह स्पष्ट नहीं किया कि प्रोबेशन अधिकारी की सकारात्मक रिपोर्ट के बावजूद गांव में तनाव और सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका किस आधार पर बनी हुई है। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि न्यायिक हिरासत से फरार होने के मामले में जब अनिल शर्मा को 25 फरवरी 2014 को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया था, तो फिर इस आरोप को रिहाई खारिज करने का आधार क्यों बनाया गया।

क्या है पूरा मामला?

अनिल शर्मा को वर्ष 1999 में बंदी सुधीर सिंह उर्फ भोमा की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 2002 में उन्हें मृत्युदंड सुनाया था, जिसे बाद में हाईकोर्ट ने आजीवन कारावास में बदल दिया। अनिल शर्मा वास्तविक कारावास और रिमिश्रण (रेमिशन) सहित 26 साल से अधिक यानी करीब 29 साल जेल में बिता चुके हैं।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।