सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मानवाधिकार आयोग जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक निकाय के पदों को लंबे समय तक रिक्त नहीं रखा जा सकता। आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति नहीं होने से इसके कामकाज पर असर पड़ रहा है।
2018 से खाली है अध्यक्ष का पद
याचिका में अदालत का ध्यान इस ओर दिलाया गया कि झारखंड राज्य मानवाधिकार आयोग में अध्यक्ष का पद वर्ष 2018 से रिक्त है। इसके अलावा आयोग के अन्य महत्वपूर्ण पद भी लंबे समय से खाली बताए गए हैं।
पिछली सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया था कि नियुक्ति से जुड़ा मामला फिलहाल सरकार के आला अधिकारियों के स्तर पर लंबित है। इसके बाद कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए रिक्त पदों को भरने के लिए समयसीमा तय कर दी।
लंबित मामलों की सुनवाई पर भी असर
राज्य में मानवाधिकार से जुड़े कई मामले लंबित हैं। आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति नहीं होने के कारण इन मामलों की सुनवाई प्रभावित हो रही है। इससे शिकायतों के निपटारे में भी देरी हो रही है।
गौरतलब है कि इससे पहले जस्टिस आरआर प्रसाद राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष के पद पर रहे थे। उनके कार्यकाल के बाद से ही अध्यक्ष का पद रिक्त है। अब हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सरकार के सामने आयोग के खाली पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने की समयसीमा तय हो गई है।

