रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने कोल माइंस प्रॉविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (सीएमपीएफओ) में हुए 727.67 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) से कराने का आदेश जारी किया है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कोल एम्प्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन के संजीव श्रीवास्तव द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई पूरी करते हुए यह निर्णय सुनाया। यह पूरा मामला दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (डीएचएफएल) में सीएमपीएफओ द्वारा 1300 करोड़ रुपये के निवेश से संबंधित है। डीएचएफएल के दिवालिया होने की वजह से लाखों कोयलाकर्मियों के भविष्य निधि (पीएफ) के 727.67 करोड़ रुपये डूब गए।

सुनवाई के दौरान सामने आया कि फंड मैनेजर एसबीआई और यूटीआई ने 24 जून 2019 को ही डीएचएफएल की खराब वित्तीय स्थिति की चेतावनी देते हुए रेड अलर्ट जारी किया था और रकम निकालने की सलाह दी थी। हालांकि, तत्कालीन ट्रस्टी ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया। कंपनी के दिवालिया होने के 6 माह बाद 20 दिसंबर 2019 को रकम निकालने का प्रस्ताव तो पारित किया गया, लेकिन 22 नवंबर 2021 को इस 727.67 करोड़ रुपये को राइट ऑफ (बट्टे खाते में डालने) करने का प्रस्ताव लाया गया, जिसका कर्मचारियों ने भारी विरोध किया।
मामले में विभागीय कार्रवाई शुरू होने के बावजूद रिपोर्ट आने से पहले ही सीएमपीएफओ द्वारा अपने अधिकारियों को क्लीन चिट दे दिए जाने के पहलू को हाईकोर्ट ने बेहद गंभीरता से लिया है। अब इस मामले की पूरी निष्पक्ष जांच सीबीआइ करेगी ताकि दोषियों की जवाबदेही तय की जा सके।


