

रांची: झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में हुई धांधली की जांच कर रही सीआईडी के हाथ एक बड़ी सफलता लगी है। जांच के दौरान सीआईडी को इस पूरे फर्जीवाड़े में एक अंतरराज्यीय गिरोह की संलिप्तता के ठोस संकेत मिले हैं। पूछताछ में आरोपी मो. एबाद ने खुलासा किया है कि उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा धांधली का मुख्य आरोपी अतुल वत्स जेपीएससी परीक्षा में भी धांधली कराने में शामिल था। उसने जेपीएससी परीक्षा में ओएमआर शीट (OMR Sheet) की सेटिंग कराने में अभ्यर्थियों की मदद की थी और इस काम के लिए 16 लोगों का एक पूरा सिंडिकेट काम कर रहा था।





पुलिस ने अतुल वत्स को 12 अप्रैल 2026 को 164 अन्य लोगों के साथ तमाड़ थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियों के अनुसार, अतुल का नेटवर्क बेहद व्यापक है और वह नीट (NEET) पेपर लीक 2024, राजस्थान क्लर्क भर्ती परीक्षा 2017, बिहार सीएचओ भर्ती 2024 और यूपी सिपाही भर्ती परीक्षा 2024 जैसे कई बड़े मामलों में भी आरोपी रहा है।
मामले की जांच में मुख्य आरोपी टीडीपीएल (TDPL) कंपनी के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी से जुड़ी कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। अभय तिवारी ने अपनी अवैध कमाई को अलग-अलग साझेदारों के जरिए मार्ट, शराब दुकान, होटल, मैनपावर कंपनी और जमीन की खरीद-बिक्री जैसे विभिन्न व्यवसायों में लगाया था। बताया जा रहा है कि इस कारोबार में एक कारोबारी आशीष की भी भागीदारी है, जिसका भाई पुलिस महकमे में एक आईपीएस (IPS) अधिकारी है और कथित तौर पर इसी रसूख का इस्तेमाल कारोबार बढ़ाने में किया गया।
सीआईडी को दिए गए बयान में अभय तिवारी ने स्वीकार किया है कि उसने पद के हिसाब से 20 से 35 लाख रुपये तक की डील तय की थी। एफआरओ-एसीएफ (FRO-ACF) भर्ती परीक्षा में करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये की वसूली के साक्ष्य मिले हैं। इसके साथ ही वह सरकारी दफ्तरों में अफसरों को किराये पर गाड़ियां मुहैया कराने और जमीन के बड़े सौदों में भी शामिल था। वहीं, जेएसएससी जेई (JSSC JE) पेपर लीक मामले में मुंबई से गिरफ्तार आरोपी अरुण शर्मा का तार भी इसी गिरोह से जुड़ता दिख रहा है।
झारखंड हाईकोर्ट ने जेपीएससी में अध्यक्ष और सदस्यों के खाली पदों पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से जवाब तलब करते हुए पूछा कि अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति कब तक होगी। कोर्ट ने कहा कि जेपीएससी एक संवैधानिक संस्था है, इसलिए इसके अध्यक्ष का पद खाली नहीं छोड़ा जा सकता। मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को तय की गई है।
