

धनबाद: साइबर ठगी के मामलों में अपराधियों तक पहुंचने के लिए धनबाद पुलिस ने अब पैसों के लेनदेन पर भी शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है। ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते में भेजने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले म्यूल अकाउंट की पहचान और उन पर कार्रवाई को लेकर पुलिस और बैंक अधिकारियों के बीच समन्वय बढ़ाया जा रहा है।





वरीय पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार के निर्देश पर चल रहे साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान के तहत गुरुवार को समाहरणालय स्थित पुलिस सभागार में सरकारी और निजी बैंकों के शाखा प्रबंधकों के साथ बैठक हुई। यह बैठक अभियान के चौथे चरण के तहत आयोजित की गई। इसमें धनबाद अनुमंडल क्षेत्र की 82 बैंक शाखाओं के प्रबंधकों ने हिस्सा लिया।
बैठक की अध्यक्षता ग्रामीण एसपी एस. मोहम्मद याकूब ने की। इस दौरान डीएसपी विधि व्यवस्था प्रकाश सोय, साइबर डीएसपी प्रदीप कुमार साव, धनसार थाना प्रभारी मनोहर करमाली सहित पुलिस और बैंकिंग क्षेत्र के अधिकारी मौजूद रहे।
संदिग्ध खातों की पहचान पर जोर
बैठक में साइबर ठगी की रकम को ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल होने वाले संदिग्ध बैंक खातों की पहचान और उन पर तत्काल कार्रवाई को लेकर चर्चा की गई। पुलिस ने बैंक अधिकारियों के साथ म्यूल अकाउंट, अचानक होने वाले बड़े वित्तीय लेनदेन, नए खातों में असामान्य ट्रांजैक्शन और कम समय में कई खातों के बीच रकम के हस्तांतरण जैसे पैटर्न साझा किए।
पुलिस ने बैंक अधिकारियों से कहा कि किसी खाते में संदिग्ध गतिविधि नजर आने पर इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दी जाए। ग्रामीण एसपी एस. मोहम्मद याकूब ने कहा कि साइबर अपराध के मामलों में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। ठगी की रकम कुछ ही समय में कई खातों में ट्रांसफर हो सकती है। ऐसे में बैंक की ओर से समय पर मिलने वाली जानकारी रकम को आगे जाने से रोकने में मददगार हो सकती है।
नए बैंक खातों की भी होगी निगरानी
बैठक में नए बैंक खातों के फिजिकल वेरिफिकेशन और खाताधारकों के मोबाइल नंबर के सही सत्यापन पर भी जोर दिया गया। पुलिस ने कहा कि असामान्य तरीके से खोले जा रहे नए खातों पर विशेष नजर रखी जाए।
अगर किसी इलाके में अचानक बड़ी संख्या में बैंक खाते खोले जा रहे हों या कोई व्यक्ति दूसरे लोगों के नाम पर खाते खुलवाने में सक्रिय हो, तो इसकी जानकारी पुलिस के साथ साझा करने को कहा गया।
इसके अलावा ऑनलाइन गेमिंग, सट्टेबाजी और दूसरी संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े असामान्य वित्तीय लेनदेन की निगरानी बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए।
पुलिस और बैंक मिलकर साइबर अपराधियों पर कसेंगे शिकंजा
धनबाद पुलिस का मानना है कि साइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए सिर्फ डिजिटल सुरागों के आधार पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। अपराधियों के आर्थिक नेटवर्क को तोड़ना भी उतना ही जरूरी है।
पुलिस और बैंकिंग संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय के जरिए ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने और संदिग्ध खातों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। पुलिस की रणनीति अब साइबर ठगी की रकम के प्रवाह को शुरुआती स्तर पर रोकने और उसके जरिए पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की है।
