झारखंड हाईकोर्ट ने रद्द की दुमका के पूर्व बंदोबस्त पदाधिकारी के खिलाफ SC-ST एक्ट की प्राथमिकी

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Jharkhand High Court cancels SC-ST Act : झारखंड हाईकोर्ट ने दुमका के तत्कालीन बंदोबस्त पदाधिकारी सुनील कुमार के खिलाफ अनुसूचित जाति और जनजाति (अत्याचार निवारण) एक्ट, 1989 के तहत दर्ज प्राथमिकी को रद्द कर दिया है।

जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की एकल पीठ ने 24 अप्रैल, 2025 को सुनाए गए फैसले में कहा कि सुनील कुमार के खिलाफ दर्ज मामला संज्ञेय अपराध की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए प्राथमिकी को रद्द करना उचित है।

मामला अक्टूबर 2023 का है, जब दुमका जिले की एक आदिवासी महिला ने सुनील कुमार पर जातिगत टिप्पणी और उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए दुमका थाने में SC-ST एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

महिला का आरोप था कि भूमि बंदोबस्त के एक मामले में सुनील ने उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं की और उनकी जाति को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की।

सुनील कुमार ने इस प्राथमिकी को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उनकी ओर से अधिवक्ता ने तर्क दिया कि आरोप निराधार हैं और प्राथमिकी में लगाए गए तथ्य SC-ST एक्ट के तहत अपराध की परिभाषा को पूरा नहीं करते।

साथ ही, यह दावा किया गया कि मामला व्यक्तिगत रंजिश से प्रेरित था।

जस्टिस चौधरी ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड की जांच के बाद प्राथमिकी को रद्द करने का आदेश दिया। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि SC-ST एक्ट के तहत मामला तभी दर्ज हो सकता है, जब जातिगत अपमान या उत्पीड़न का स्पष्ट सबूत हो, जो इस मामले में नहीं पाया गया।

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