रांची: झारखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए अब महज छह महीने का समय बाकी रह गया है, लेकिन राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा पर पहली बार जारी 658 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि विभागीय गाइडलाइन के इंतजार में अटकी पड़ी है। राशि उपलब्ध होने के बावजूद स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी न होने से राज्य की 4,423 पंचायतों में विकास कार्य ठप पड़े हैं, जिससे करीब 2.50 करोड़ ग्रामीण आबादी सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है।

गौरतलब है कि पांचवें राज्य वित्त आयोग की सिफारिश पर पंचायती राज विभाग ने मार्च 2026 में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए इस फंड का आवंटन जिला परिषद, पंचायत समिति और ग्राम पंचायतों के बीच 10:15:75 के अनुपात में किया था। इसके तहत ग्राम पंचायतों को सबसे बड़ा हिस्सा यानी करीब 493.51 करोड़ रुपये मिले हैं। वहीं पंचायत समितियों को 98.70 करोड़ रुपये और जिला परिषदों को 65.80 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। वर्ष 2010 के बाद यह पहला मौका है जब राज्य वित्त आयोग के माध्यम से पंचायतों के विकास के लिए इतनी बड़ी राशि आवंटित की गई है।
सड़क, पानी और मरम्मत से जुड़े काम पड़े ठप
गाइडलाइन तय न होने से यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि इस फंड को किस मद में और किस प्रक्रिया के तहत खर्च किया जाए। इसका सीधा असर ग्रामीणों की रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ रहा है। गांवों में सड़क, नाली, जलापूर्ति योजनाओं के तहत जलमीनार में मोटर खराबी ठीक करना, बंद पड़े काम शुरू कराना, आंगनबाड़ी केंद्रों व स्कूलों में जरूरी छोटे-मोटे मरम्मत कार्य पूरी तरह से रुक गए हैं।


