
रांची : झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर होने वाले चुनाव ने महागठबंधन और भाजपा दोनों खेमों में हलचल बढ़ा दी है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि कौन सा दल किस चेहरे पर दांव लगाएगा। संख्या बल के हिसाब से महागठबंधन दोनों सीटें जीतने की स्थिति में दिख रहा है, लेकिन अंदरखाने टिकट को लेकर खींचतान शुरू हो चुकी है। कांग्रेस इस बार एक सीट पर मजबूत दावेदारी कर रही है। पार्टी के भीतर कई बड़े नेताओं के नाम चर्चा में हैं। इनमें राजेश ठाकुर, प्रदीप बलमुचू, सुबोधकांत सहाय और फुरकान अंसारी का नाम प्रमुख रूप से लिया जा रहा है। वहीं कांग्रेस नेता शहजादा अनवर ने भी पार्टी आलाकमान के सामने अपनी दावेदारी पेश कर दी है, जिससे सियासी माहौल और गरमाया हुआ है।
झामुमो ने अभी नहीं खोले पत्ते
दूसरी ओर झामुमो फिलहाल अपने उम्मीदवारों को लेकर खुलकर कुछ नहीं बोल रही है। पार्टी नेतृत्व अभी ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति पर काम करता दिख रहा है। इसी बीच शिबू सोरेन की बेटी अंजलि सोरेन ने भी चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है। इसके बाद राजनीतिक समीकरण और दिलचस्प हो गए हैं। माना जा रहा है कि झामुमो आखिरी समय तक अपने उम्मीदवार को लेकर रणनीतिक चुप्पी बनाए रख सकता है।
भाजपा भी तैयार कर रही नई रणनीति
उधर भाजपा ने साफ संकेत दिया है कि इस बार किसी बाहरी या निर्दलीय चेहरे पर दांव नहीं लगाया जाएगा। पार्टी अपने समर्पित नेता को ही उम्मीदवार बनाने की तैयारी में है। भाजपा खेमे में दीपक प्रकाश, रघुवर दास और आशा लकड़ा के नाम चर्चा में हैं। हालांकि सबसे ज्यादा चर्चा अर्जुन मुंडा और आईआरएस अधिकारी निशा उरांव को लेकर हो रही है।
आखिर क्यों चर्चा में हैं निशा उरांव?
निशा उरांव का नाम सामने आने के पीछे कई राजनीतिक वजहें बताई जा रही हैं। वह कांग्रेस विधायक और वरिष्ठ आदिवासी नेता रामेश्वर उरांव की बेटी हैं। ऐसे में अगर भाजपा उन्हें उम्मीदवार बनाती है तो इसे कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा सकता है। इसके साथ ही भाजपा एक युवा, शिक्षित और आदिवासी महिला चेहरे को सामने लाकर बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश भी कर सकती है। देखा जाए तो यह राज्यसभा चुनाव सिर्फ दो सीटों की लड़ाई नहीं है, बल्कि आने वाले समय की राजनीति और 2029 के समीकरणों की दिशा तय करने वाला संकेत भी बन सकता है। यही वजह है कि सभी दल अपने-अपने राजनीतिक गणित को साधने में जुटे हुए हैं।

