

रांची: झारखंड सरकार के श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग ने मजदूरी संहिता (झारखंड) नियमावली-2026 का प्रारूप जारी कर दिया है। इसके तहत अब राज्य में न्यूनतम मजदूरी की दरें तय करने के लिए चार सदस्यों वाले मानक श्रमिक परिवार को आधार माना जाएगा, जिसमें कमाने वाले कामगार के अलावा उसकी पत्नी या पति और दो बच्चे शामिल होंगे। यह आधार तीन उपभोग इकाइयों के समान होगा। नियमावली के अनुसार जिस परिवार में प्रतिदिन प्रति उपभोग इकाई 2700 कैलोरी का भोजन और प्रति परिवार प्रति वर्ष 66 मीटर कपड़े का उपयोग होता है, उसे भी न्यूनतम मजदूरी तय करने का प्रमुख आधार माना गया है।





न्यूनतम मजदूरी की दरों के निर्धारण और कुशल वर्गीकरण पर राज्य सरकार को सलाह देने के लिए एक तकनीकी समिति का गठन किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता श्रमायुक्त करेंगे। इसमें मुख्य कारखाना निरीक्षक, ग्रामीण विकास, जल संसाधन, लोक निर्माण, शिक्षा क्षेत्र और गैर-सरकारी संगठनों से नामित प्रतिनिधि और आठ श्रमिक प्रतिनिधि भी सदस्य होंगे।
विभाग द्वारा जारी नए नियमों के तहत सामान्य कार्य दिवस में आठ घंटे का कार्य होगा और एक घंटे का विश्राम अंतराल दिया जाएगा। किसी भी हाल में विश्राम अंतराल सहित कुल कार्य अवधि 12 घंटे और सप्ताह में 48 घंटे से अधिक नहीं होगी। इसके अलावा, नियोजित कर्मचारियों को सप्ताह में कम से कम एक दिन का विश्राम मिलेगा, जो सामान्यतः रविवार होगा। हालांकि नियोक्ताओं को कर्मचारियों से लगातार 10 दिनों से अधिक बिना अवकाश के काम कराने की अनुमति नहीं होगी।
श्रम विभाग ने इस नियमावली 2026 के साथ-साथ तीन अन्य नियमावलियों औद्योगिक संबंध नियमावली-2026, सामाजिक सुरक्षा नियमावली-2026 और सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं वर्किंग कंडीशन नियमावली-2025 का प्रारूप भी जारी किया है। इन सभी ड्राफ्ट पर आम लोगों से सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं, जिन्हें श्रमायुक्त कार्यालय की आधिकारिक ईमेल आईडी पर भेजा जा सकता है।
