जितेंद्र जी आपका असमय चला जाना बहुत खलेगा

जितेंद्र जी के निधन पर दयानंद राय ने भावुक श्रद्धांजलि दी, उनके पत्रकारिता जीवन, सादगी, ईमानदारी और आईनेक्स्ट सूचना विभाग में योगदान को याद करते हुए स्मृतियों साझा किया।

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दयानंद राय

सूचना तो कल ही मिल गयी थी कि जितेंद्र जी नहीं रहे, पर कल कुछ लिख नहीं पाया। आज जब जितेंद्र जी के बारे में सोच रहा हूं तो आइनेक्स्ट में उनके साथ बिताए दिनों के साथ झारखंड सरकार के सूचना और जनसंपर्क विभाग में बतौर एपीआरओ निभाए गए उनके किरदार की यादें जेहन में बरबस घूमने लगी हैं।

एक वाक्य में कहूं तो जितेंद्र जी सज्जनता के पर्याय थे, फालतू बातों से उनका कोई साबका नहीं था, बस काम से काम और दूसरा कुछ नहीं। कई बार जब मुख्यमंत्री से रिलेटेड किसी समाचार की जरूरत होती थी और जितेंद्र जी को फोन करता था तो वे समाचार भेज देते थे। एक-दो दफा उनके लोवाडीह स्थित घर पर भी जाना हुआ।

आईनेक्स्ट में उनकी संपादन कला का मैं मुरीद था। एक इंसान और एक पत्रकार के रूप में वे परफेक्ट थे और ईश्वर को भी अच्छे लोग पसंद आते हैं। मृत्यु पर किसी का वश नहीं चलता, जितेंद्र जी चले गए हैं, लेकिन उनसी जुड़ी स्मृतियां कहां जायेंगी, उनकी स्मृतियां यादों में जीवंत रहेगी। हमेशा, हरपल, पलपल।
विनम्र श्रद्धांजलि।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।