रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं की जांच कर रही सीआईडी (विशेष जांच दल) का शिकंजा अब सफल अभ्यर्थियों पर कसता जा रहा है। सिविल सेवा परीक्षा कराने वाली निजी एजेंसी ‘आईटीआई लिमिटेड’ के प्रतिनिधि कृष्णा कुमार से पूछताछ के दौरान मिली जानकारियों के बाद सीआईडी की जांच का दायरा काफी बढ़ गया है। इस मामले में बिचौलिए ब्रजलाल की गिरफ्तारी के बाद अब जांच टीम के हाथ लगभग एक दर्जन से अधिक ऐसे नए अभ्यर्थियों के सुराग लगे हैं, जिन्होंने कथित तौर पर अनैतिक हथकंडों के माध्यम से सफलता हासिल की है। सीआईडी इन सभी चिन्हित अभ्यर्थियों को जल्द ही समन भेजकर आमने-सामने बिठाकर पूछताछ करने की तैयारी कर रही है।

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आईटीआई लिमिटेड के निदेशक से पूछताछ के दौरान अभय तिवारी समेत कई अन्य नवनियुक्त अफसरों के नाम सामने आए हैं। सीआईडी अब तक इस केस में कुल 38 गिरफ्तारियां कर चुकी है और लगभग 550 सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ कर चुकी है। जांच अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ के दौरान अधिकांश अभ्यर्थियों ने पैसे के लेन-देन से साफ इनकार किया, लेकिन जब उनसे सामान्य ज्ञान के बेहद सीधे और बुनियादी सवाल पूछे गए, तो 70 प्रतिशत से अधिक अधिकारी उनका सही जवाब तक नहीं दे पाए। इसी आधार पर पुख्ता सबूत जुटाकर कइयों को पूर्व में गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
सिपाही बहाली मामले में भी हाईकोर्ट ने जेपीएससी से मांगा जवाब
दूसरी तरफ, वर्ष 2015 की जेपीएससी सिपाही बहाली परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति न मिलने के मामले पर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने याचिका पर सुनवाई करते हुए जेपीएससी से जवाब तलब किया है और अगली सुनवाई की तिथि 9 दिसंबर तय की है। प्रार्थियों की ओर से अदालत को बताया गया कि वे शारीरिक, मेडिकल और लिखित परीक्षा पास कर चुके हैं, इसके बावजूद 7,272 पदों में से 1,518 पद अभी भी खाली पड़े हैं। अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेश का हवाला देते हुए मांग की है कि इन बढ़ी हुई रिक्तियों पर उनका समायोजन कर अविलंब नियुक्ति दी जाए।


