रांची: झारखंड के सरकारी और निजी चिकित्सकों के संयुक्त आंदोलन को बड़ी सफलता मिली है। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक में डॉक्टरों की प्रमुख मांगों पर सहमति बन गई है, जिसके बाद डॉक्टरों ने फिलहाल हड़ताल पर जाने का फैसला टाल दिया है। छठ पर्व के बाद अन्य मुद्दों पर फिर से चर्चा की जाएगी।

आईएमए (IMA) और झासा (JHASA) सहित विभिन्न चिकित्सक संगठनों ने इस समझौते को अपनी एकजुटता की बड़ी जीत बताया है। बैठक में विभाग की ओर से विशेष सचिव डॉ. नेहा अरोड़ा व संयुक्त सचिव ललित मोहन शुक्ला और डॉक्टरों की ओर से डॉ. प्रदीप कुमार सिंह, डॉ. मृत्युंजय सिंह, डॉ. विमलेश कुमार सिंह समेत कई चिकित्सक मौजूद रहे।
बैठक में बनी मुख्य सहमति
समयबद्ध पदोन्नति: केंद्र और बिहार की तर्ज पर सामान्य, दंत और विशेषज्ञ चिकित्सकों को समयबद्ध पदोन्नति देने का रास्ता साफ हो गया है। इस पर वित्त विभाग से विचार-विमर्श कर जल्द प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
अस्पतालों के पंजीकरण और नियम में संशोधन: चिकित्सा संस्थानों के पंजीकरण कानून में संशोधन का प्रस्ताव अगले दो महीने में मंत्रिमंडल को भेजा जाएगा। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में न्यूनतम 30 और शहरी क्षेत्रों में 40 बिस्तरों की अनिवार्यता पर सहमति बनी है।
साथ ही, पंजीकरण प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए ‘सिंगल विंडो’ (एकल खिड़की) व्यवस्था लागू होगी।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम: डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुरानी व्यवस्था को फिर से बहाल करते हुए डीएसपी स्तर के अधिकारी को नोडल पदाधिकारी बनाया जाएगा।
रेजिडेंट्स के प्रोत्साहन भत्ते: इंटर्न तथा कनिष्ठ व वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टरों को मिलने वाले प्रोत्साहन (इंसेंटिव) भुगतान में आ रही अनियमितताओं को दूर कर व्यवस्था को नियमित किया जाएगा।
समन्वय समिति का गठन: मांगों के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए स्वास्थ्य विभाग स्तर पर एक समन्वय समिति का गठन किया जाएगा।


