PG की डिग्री नहीं है, फिर भी बन सकते हैं शिक्षक? झारखंड हाईकोर्ट के फैसले ने बदल दी पूरी तस्वीर!

झारखंड हाईकोर्ट ने अपने अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि संशोधित विज्ञापन के तहत आवेदन करने वाले शिक्षकों की उम्मीदवारी सिर्फ पीजी डिग्री न होने पर रद्द नहीं की जा सकती।

Razi Ahmad
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Jharkhand High Court News: झारखंड में शिक्षक बनने का सपना देख रहे अभ्यर्थियों के लिए हाईकोर्ट से बड़ी खबर सामने आई है। संस्कृत, उर्दू, फारसी और अरबी विषयों में शिक्षक नियुक्ति को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब सरकार ने संशोधित विज्ञापन में स्नातक की डिग्री के आधार पर पात्रता निर्धारित की थी, तो बाद में पीजी या आचार्य की डिग्री नहीं होने के आधार पर अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी रद्द नहीं की जा सकती।
न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने 14 अक्टूबर 2026 को कई याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए संबंधित अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने का निर्देश दिया। अदालत ने पूरी प्रक्रिया आदेश की प्रति मिलने के चार सप्ताह के भीतर पूरी करने को कहा है।

17,786 शिक्षकों की भर्ती से जुड़ा है मामला

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने 28 दिसंबर 2016 को विज्ञापन संख्या 21/2016 जारी कर 17,786 स्नातक प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की थी। इसमें संस्कृत, उर्दू, फारसी और अरबी विषयों के पद भी शामिल थे।

शैक्षणिक योग्यता को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के बाद राज्य सरकार ने जनवरी 2017 में स्पष्टीकरण जारी किया और आयोग ने संशोधित विज्ञापन के जरिए संबंधित विषयों की पात्रता निर्धारित की।

परीक्षा पास करने के बाद भी क्यों रद्द हुई उम्मीदवारी?

अभ्यर्थियों ने संशोधित विज्ञापन के आधार पर आवेदन किया, परीक्षा पास की और दस्तावेज सत्यापन में भी शामिल हुए। इसके बावजूद 21 जून 2023 के नोटिस के जरिए उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी गई।

कारण बताया गया कि आवेदन की अंतिम तिथि तक उनके पास संबंधित विषय में पीजी या आचार्य की डिग्री नहीं थी। इसके बाद अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस फैसले को चुनौती दी।

सरकार की दलील पर हाईकोर्ट ने क्या कहा?

राज्य सरकार और JSSC ने अदालत में दलील दी कि मूल नियमावली में पीजी या आचार्य की डिग्री का प्रावधान था। हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार की ओर से नियम 16 के तहत जारी स्पष्टीकरण को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अदालत के अनुसार, जब अभ्यर्थियों ने सरकार की ओर से निर्धारित पात्रता और संशोधित विज्ञापन के आधार पर चयन प्रक्रिया में हिस्सा लिया, तो बाद में अलग शर्त लागू कर उनकी उम्मीदवारी खारिज करना उचित नहीं था।

चार सप्ताह में नियुक्ति, अभ्यर्थियों को बड़ी राहत

हाईकोर्ट ने उम्मीदवारी रद्द करने वाले संबंधित आदेशों को निरस्त कर दिया है। अदालत ने राज्य सरकार, शिक्षा विभाग और JSSC को याचिकाकर्ताओं की उम्मीदवारी स्वीकार कर उन्हें स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक के पद पर नियुक्त करने और नियमानुसार परिणामी लाभ देने का निर्देश दिया है।

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रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।