जेसीबी लेकर पहुंची नगर निगम की टीम, क्यों हुआ विवाद?
जानकारी के अनुसार, शनिवार को नगर निगम की विजिलेंस टीम जेसीबी लेकर विवादित जमीन पर गड्ढा खोदने पहुंची थी। इसी दौरान स्थानीय आदिवासी परिवारों ने टीम से 10 फीट का रास्ता छोड़ने की मांग की।
परिवारों का आरोप है कि उनकी अपील पर ध्यान नहीं दिया गया और इसी बात को लेकर नगर निगम के अधिकारियों तथा स्थानीय लोगों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते स्थिति धक्का-मुक्की तक पहुंच गई।
10 फीट रास्ता छोड़ने की मांग कर रहे स्थानीय परिवार
स्थानीय आदिवासी परिवारों का कहना है कि इस रास्ते से कई परिवारों का आवागमन होता है। ऐसे में रास्ता बंद होने या संकरा होने से उन्हें रोजमर्रा की आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
परिवारों के मुताबिक, वे इस मामले को लेकर पहले भी नगर आयुक्त से मुलाकात कर चुके हैं। उनका दावा है कि उन्हें रास्ते को लेकर आश्वासन भी मिला था। इसके बावजूद नगर निगम की टीम के गड्ढा खोदने पहुंचने से विवाद खड़ा हो गया।
नगर निगम पर जानबूझकर रास्ता संकरा करने का आरोप
स्थानीय लोगों ने नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सड़क पर गड्ढा खोदने का प्रयास जानबूझकर किया जा रहा है। उनका कहना है कि इससे करीब 30 परिवारों के लिए रास्ता संकरा होने की आशंका है।
परिवारों ने नगर निगम की विजिलेंस टीम पर मनमाने तरीके से काम करने का आरोप भी लगाया है।
65 डिसमिल जमीन का विवाद, आगे क्या होगा?
मोरहाबादी स्थित रजिस्ट्री कार्यालय के पीछे की 65 डिसमिल जमीन को लेकर विवाद के बीच अब रास्ते के इस्तेमाल और नगर निगम की कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय परिवार 10 फीट रास्ता छोड़ने की मांग कर रहे हैं।
हालांकि, जमीन और रास्ते के स्वामित्व, नगर निगम की कार्रवाई के आधिकारिक आधार तथा पूरे मामले में निगम का पक्ष स्पष्ट होना बाकी है। फिलहाल विवाद को लेकर स्थानीय परिवारों के आरोप सामने आए हैं।


