JPSC-JSSC परीक्षा सुधार पर सरकार की बड़ी घोषणा अधूरी! दो महीने बाद भी नहीं बनी समिति, 45 परीक्षाओं पर पड़ा था असर

झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षा सुधार के लिए दो महीने में समिति बनाने का वादा अधूरा रह गया। IAS अमिताभ कौशल की अध्यक्षता वाली समिति का गठन अब तक नहीं हुआ।

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रांची: झारखंड में JPSC और JSSC की परीक्षाओं में सुधार को लेकर सरकार की घोषणा अब तक जमीन पर नहीं उतर पाई है। परीक्षाओं में गड़बड़ी और नियुक्ति में अनियमितताओं के खुलासे के बाद सरकार ने सुधार के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाने का फैसला लिया था। इस समिति की अध्यक्षता IAS अधिकारी अमिताभ कौशल को करनी थी। साथ ही, समिति को दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया था। लेकिन हैरानी की बात है कि दो महीने बीत जाने के बाद भी समिति का गठन नहीं हो सका है।

दरअसल, झारखंड में JPSC और JSSC की ओर से आयोजित परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और अयोग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति के मामले सामने आने के बाद सरकार ने 18 अगस्त 2026 को एक आदेश जारी किया था। कार्मिक एवं प्रशासनिक विभाग की ओर से जारी इस आदेश का असर कुल 45 परीक्षाओं पर पड़ा था।सरकार ने इस आदेश के तहत 22 परीक्षाओं को रद्द कर दिया था, जबकि छह परीक्षाओं को स्थगित कर दिया गया था। वहीं, 17 अन्य परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखा गया था। इसी दिन सरकार ने अधिसूचना संख्या 5409 जारी कर JPSC और JSSC की परीक्षा प्रक्रिया में सुधार के लिए एक विशेष समिति गठित करने की भी घोषणा की थी।

इस समिति की कमान IAS अधिकारी अमिताभ कौशल को सौंपी जानी थी। समिति में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारियों के अलावा प्रतिष्ठित संस्थानों के निदेशकों को भी शामिल करने की योजना थी। इसका मुख्य उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में मौजूद खामियों की पहचान करना और उनमें सुधार के लिए सुझाव देना था। समिति को इसके लिए दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी थी। हालांकि, तय समय सीमा बीत जाने के बावजूद सरकार की ओर से अब तक समिति का गठन नहीं किया गया है। ऐसे में JPSC और JSSC की परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर सरकार की घोषणा पर अमल का इंतजार बना हुआ है।

इधर, नियुक्ति घोटाले की जांच कर रही CID की कार्रवाई लगातार जारी है। जांच के दौरान JPSC के अध्यक्ष समेत कई अधिकारी, कथित घोटाले में शामिल कंपनियों के अधिकारी और पैसे के दम पर सफल हुए उम्मीदवार जेल जा चुके हैं। इसके बावजूद परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए प्रस्तावित समिति का गठन नहीं होना कई सवाल खड़े कर रहा है।

 

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।