

रांची: झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (JUVNL) और इसकी अनुषंगी कंपनियों JBVNL, JUSNL एवं JUUNL में पुरानी पेंशन योजना के तहत आने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के जीपीएफ (GPF) को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।





झारखंड ऊर्जा विकास श्रमिक संघ के अध्यक्ष अजय राय ने JUVNL के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक को एक ई-मेल भेजकर कर्मचारियों के वेतन से वर्षों से हो रही जीपीएफ कटौती, अग्रिम-निकासी की सुविधा पर रोक और संचित निधि के रख-रखाव में भारी गड़बड़ी की आशंका जताते हुए उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है।
अजय राय ने प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कर्मचारियों के वेतन से हर महीने नियमित रूप से जीपीएफ की राशि काटी जा रही है और उन्हें जीपीएफ नंबर भी आवंटित है।
पोर्टल पर यह राशि उनके खातों में दिखाई तो देती है, लेकिन जब कोई कर्मचारी अपने घर के निर्माण, बच्चों की उच्च शिक्षा, विवाह या गंभीर बीमारी जैसे आकस्मिक संकट के समय नियमानुसार अपने ही पैसे की अग्रिम निकासी करना चाहता है, तो उसे नियमों का हवाला देकर टालमटोल किया जा रहा है और इस सुविधा से वंचित रखा जा रहा है।
संघ ने जीपीएफ ट्रस्ट के गठन में हुए वर्षों के विलंब पर सवाल उठाते हुए प्रबंधन से पूछा है कि यदि ट्रस्ट का विधिवत गठन नहीं हुआ है, तो कर्मचारियों की काटी गई करोड़ों रुपये की संचित राशि वर्तमान में किस खाते में जमा है और इसका संचालन तथा लेखांकन कौन कर रहा है।
उन्होंने आशंका जताई है कि क्या इस राशि का निवेश किसी सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना किया जा रहा है। अजय राय ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जीपीएफ कर्मचारियों की गाढ़ी कमाई और उनकी जीवनभर की सुरक्षा से जुड़ा मामला है, कोई निजी संपत्ति नहीं।
संघ ने मांग की है कि प्रबंधन जीपीएफ राशि के एक-एक रुपये का हिसाब पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक करे, अंतरिम व्यवस्था बनाकर पात्र कर्मचारियों को तत्काल अग्रिम-निकासी की सुविधा दे और इस मामले में लापरवाही या अनियमितता बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उन पर सख्त कार्रवाई की जाए।
