मैं ‘दिमागी नक्सली’ हूं : कपिल सिब्बल

कपिल सिब्बल ने खुद को ‘दिमागी नक्सली’ बताते हुए जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त को मामूली राजनीतिक घोटाला नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान के लिए गंभीर संकट बताया।

Razi Ahmad
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कोच्चि: राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने रविवार को कहा कि वह ‘दिमागी नक्सली’ हैं।

‘दिमागी नक्सली’ शब्द प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गढ़ा था और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इसका इस्तेमाल कथित तौर पर नक्सलवाद का वैचारिक समर्थन करने वालों पर हमला करने के लिए करती है।

सिब्बल ने यहां ‘जनप्रतिनिधिनयों की खरीद-फरोख्त और लोकतंत्र’ पर एक चर्चा के दौरान कहा, “मुझे यह स्वीकार करना होगा कि मैं एक दिमागी नक्सली हूं।’’

सिब्बल ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त कोई ‘मामूली राजनीतिक घोटाला’ नहीं, बल्कि एक ‘संवैधानिक संकट’ है। उन्होंने कहा कि नतीजा यह होता है कि नागरिक एक जनादेश के लिए मतदान तो करता है, लेकिन “सत्ता किसी और को सौंप दी जाती है”।

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रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।