सियोल: पेशेवर टेनिस में सप्ताह दर सप्ताह खेलना, रैंकिंग अंक हासिल करना और हर दूसरे टूर्नामेंट में खेलने के लिए आत्मविश्वास बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है लेकिन दक्षिण कोरिया के खिलाड़ियों को अपने इस सफर के दौरान सेना में अनिवार्य सेवा भी देनी होती है। इसका मतलब है कि कोरिया के खिलाड़ियों को अपना करियर इस तरह से आगे बढ़ाना होता है। उन्हें सेना में 18 महीने की सेवा देने के बाद फिर से पेशेवर सर्किट में वापसी का रास्ता खोजना होता है। सेओंग चान होंग को इसका अनुभव है। इस 29 वर्षीय खिलाड़ी ने सितंबर 2024 में अपने करियर की सर्वोच्च रैंकिंग 139 हासिल की। उस वर्ष उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने साथी सूम वू क्वोन और भारत के सुमित नागल को इंडियन वेल्स में हराया था। उन्होंने 14 आईटीएफ खिताब और एक चैलेंजर खिताब भी जीता था।
लेकिन उन्हें जनवरी 2025 में सेना में सेवा देने के लिए खेल से हटना पड़ा। उन्होंने इस साल वापसी की लेकिन लंबे समय तक बाहर रहने के कारण अब उनकी रैंकिंग 1000 से नीचे है। उन्होंने वापसी के बाद से कुछ ही मैच खेले हैं और वह फिर से अपनी लय हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। कोरिया के डेविस कप कप्तान जोंग सैम चुंग ने स्थिति की कठिनाई को स्वीकार किया, लेकिन साथ ही कहा कि खिलाड़ियों के पास बहुत कम विकल्प हैं क्योंकि सैन्य सेवा सभी कोरियाई पुरुषों के लिए अनिवार्य है।
कोरिया और भारत के बीच डेविस कप मुकाबले से पहले जोंग सैम ने कहा, ‘‘जब आप अच्छा प्रदर्शन कर रहे होते हैं, तो आपका मूड भी अच्छा होना चाहिए। लेकिन सेना में सेवा देना हमारा कर्तव्य है।’’
सेना और मरीन कोर में कम से कम 18 महीने सेवा देनी होती है, जबकि नौसेना और वायु सेना के लिए यह अवधि लंबी है। कोरियाई युद्ध के बाद 1953 से यह व्यवस्था लागू की गई थी जिसमें कोरिया के पुरुषों के लिए सेना में सेवा देना अनिवार्य है। शीर्ष खिलाड़ियों के लिए हालांकि इसमें कुछ छूट दी जाती है। इन खिलाड़ियों में ओलंपिक पदक विजेता और एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता शामिल हैं। यह खिलाड़ी चार सप्ताह के बुनियादी सैन्य प्रशिक्षण को पूरा करने के बाद अपने खेल करियर को जारी रख सकते हैं। ह्योन चुंग को इसका फायदा भी मिला है। पूर्व विश्व नंबर 19 ह्योन चुंग ने लिम योंग क्यू के साथ 2014 में एशियाई खेलों में पुरुष युगल में स्वर्ण पदक जीता था और इसलिए उन्हें 2015 में सेना में पूरे 18 महीने सेवा नहीं देनी पड़ी।
ह्योन चुंग ने कहा, ‘‘मुझे किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के कारण मैंने वहां केवल चार सप्ताह ही बिताए।’’ उनका करियर इस बात का उदाहरण है कि निरंतरता कितनी महत्वपूर्ण होती है। ह्योन चुंग 2017 में पहले नेक्स्ट जेन एटीपी फाइनल चैंपियन बने और अगले साल ऑस्ट्रेलियाई ओपन के सेमीफाइनल में पहुंचे, जहां उन्होंने अलेक्जेंडर ज्वेरेव और नोवाक जोकोविच को हराया, लेकिन पैर में छाले होने के कारण रोजर फेडरर के खिलाफ मुकाबले से हट गए।

