
रांची : लातेहार जिला अंतर्गत महुआडांड़ विकसित भारत’ का दावा प्रखंड मुख्यालय से मात्र 2 किलोमीटर दूर परहाटोली पंचायत के उदालखाड गांव में आकर दम तोड़ देता है। आजादी के 78 साल बाद भी यह गांव 18वीं सदी की जिंदगी जी रहा है। यहां न शुद्ध पेयजल है, न बिजली, न पक्की सड़क और न नदी पर पुल। सरकारी योजनाएं बोर्ड और फाइलों से बाहर नहीं निकलीं।यही नहीं, जल जीवन मिशन के तहत ‘हर घर नल से जल’ का वादा उदालखाड में झूठा साबित हुआ। गांव में लगे जलमीनार सालों से खराब पड़े हैं। एक भी घर में नल चालू नहीं है। ग्रामीण दशकों से नदी और चुआ का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। गर्मी में चुआ सूखने पर महिलाओं को 2 किलोमीटर दूर नदी से सिर पर मटका ढोकर पानी लाना पड़ता है। बरसात में कीचड़ और जानवरों की गंदगी वाला पानी ही नसीब होता है।
नतीजा हर साल उल्टी-दस्त, पीलिया और चर्म रोग से दर्जनों लोग बीमार पड़ते हैं। उदालखाड आज भी लालटेन युग में कैद है। गांव में बिजली के पोल तो गाड़े गए, लेकिन आज तक करंट नहीं दौड़ा। शाम 6 बजे के बाद पूरा गांव अंधेरे में डूब जाता है। लालटेन-ढिबरी ही एकमात्र सहारा है। मोबाइल चार्ज करने के लिए युवाओं को महुआडांड़ भागना पड़ता है। सिंचाई तो दूर, पंखा-कूलर का सपना भी नहीं देख सकते। इसी तरह गांव तक पहुंचने वाली कच्ची सड़क पूरी तरह जर्जर है। बारिश में कीचड़ से लथपथ रास्ते पर चलना जान जोखिम में डालने जैसा है। पक्की सड़क आज तक नहीं बनी। गांव के बगल से बहने वाली बरसाती नदी पर पुल नहीं है। मानसून में नदी उफान पर होती है तो उदालखाड का संपर्क दुनिया से कट जाता है। बीमारों और गर्भवती महिलाओं को चारपाई पर लादकर 3 किलोमीटर घूमकर अस्पताल ले जाना पड़ता है। कई बार रास्ते में ही मौत हो जाती है। बिजली नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई सूर्यास्त के साथ ही खत्म हो जाती है। लालटेन की मद्धम रोशनी में पढ़कर 90% बच्चे 8वीं के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं। युवा रोजगार की तलाश में पलायन कर रहे हैं। मूलभूत सुविधाओं के अभाव ने गांव का सामाजिक तानाबाना तोड़ दिया है। ग्रामीण कहते हैं, _“गांव में न पानी है, न बिजली, न सड़क। लड़की वाले रिश्ता देखने आते हैं और हालत देखकर भाग जाते हैं। कहते हैं, बेटी को नर्क में नहीं धकेलेंगे।
ग्रामीणों का जिला प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने लातेहार उपायुक्त संदीप कुमार से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि हर घर नल से जल चालू हो। खराब जलमीनार को दुरुस्त किया जाए। तत्काल बिजली आपूर्ति बहाल हो। पक्की सड़क बने और नदी पर पुल का निर्माण हो।

