चंडीगढ़: लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) परिसर में हुई हिंसा के सिलसिले में सात छात्रों समेत नौ लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

जालंधर रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) नवीन सिंगला ने शुक्रवार को संवाददाताओं को बताया कि आगजनी, लूटपाट, दंगा, बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाने, पुलिस वाहनों में आग लगाने, पुलिस बल पर बिना उकसावे के हमला करने और राष्ट्रीय राजमार्ग को अवरुद्ध करने की घटनाओं के संबंध में दो प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।
डीआईजी ने कहा, “सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी विश्लेषण, मीडिया में आई खबरों, सोशल मीडिया पोस्ट और अन्य पुष्टिकारक साक्ष्यों के आधार पर दर्ज इन प्राथमिकियों के सिलसिले में अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है।”
उन्होंने बताया कि हिरासत में लिए गए लोगों में एक नाबालिग भी शामिल है।
एक अन्य मामले में, पटियाला जिले की चितकारा यूनिवर्सिटी के छात्रों ने एक सप्ताह पहले परिसर में दो छात्राओं द्वारा कथित तौर पर आत्महत्या किए जाने के अपुष्ट दावों को लेकर प्रदर्शन किया था और एक पुलिस वाहन को भी क्षतिग्रस्त कर दिया था। पटियाला पुलिस ने शुक्रवार को कहा कि घटना को लेकर सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर अफवाह फैलाने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
फगवाड़ा में एलपीयू से जुड़े मामले में डीआईजी सिंगला ने कहा कि चार लोगों को फगवाड़ा से, दो को जम्मू-कश्मीर से और दो को मुंबई से हिरासत में लिया गया है।
पुलिस के अनुसार, नाबालिग को छोड़कर गिरफ्तार किए गए लोगों में एक सोनीपत का, दो-दो फगवाड़ा, जम्मू और महाराष्ट्र के तथा एक उत्तर प्रदेश का रहने वाला है।
सिंगला ने कहा, “इनमें सात एलपीयू के छात्र हैं, जबकि दो बाहरी व्यक्ति हैं।” उन्होंने बताया कि मामले में 20 लोगों को नामजद किया गया है और बाकी आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
यह पूछे जाने पर कि क्या सोशल मीडिया ‘इन्फ्लुएंसर’ और छात्र मोहम्मद फरहत को भी मामले में नामजद किया गया है, सिंगला ने कहा, “हमने मोहम्मद फरहत को नामजद किया है। आपने सोशल मीडिया पर पोस्ट देखी होंगी, जिनमें वह नुकसान पहुंचाते हुए दिखाई दे रहा है… हम उसे गिरफ्तार कर पूछताछ करेंगे।”
हालांकि, फरहत ने हिंसक प्रदर्शन में शामिल होने से इनकार किया है।
हिंसा से पहले की घटनाओं का क्रम बताते हुए डीआईजी सिंगला ने कहा कि 26 सितंबर की शाम सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हुई, जिसमें दावा किया गया था कि छात्रावास में एक लड़की से दुष्कर्म किया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि रात में छात्र एकत्र हुए, राष्ट्रीय राजमार्ग को अवरुद्ध किया और तोड़फोड़ की।
डीआईजी ने कहा, “मैं अपने तीनों वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (एसएसपी) के साथ भारी पुलिस बल लेकर मौके पर पहुंचा और अगली सुबह तक स्थिति को नियंत्रित कर लिया। मैं यहां यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग नहीं किया गया और संयम बरता गया।”
उन्होंने कहा, “अगली सुबह कुछ छात्रों ने फिर राष्ट्रीय राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया और हमने उनसे बात की। उनकी मांग थी कि मामला दर्ज किया जाए और हमने अज्ञात लोगों के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया।”
उन्होंने कहा कि इस मामले में पीड़िता की भी पहचान नहीं हो पाई थी, क्योंकि किसी के पास उसका नाम नहीं था। उन्होंने बताया, “हमने एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है, जो जांच कर रहा है ।”
एलपीयू के छात्रों ने पिछले रविवार को बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया था और विश्वविद्यालय परिसर के बाहर नयी दिल्ली-अमृतसर राजमार्ग के एक हिस्से को भी अवरुद्ध कर दिया था। उनका दावा था कि किसी बाहरी व्यक्ति ने विश्वविद्यालय परिसर में एक छात्रा से दुष्कर्म किया।


