- एग्री क्लिनिक का किसान शिविर: टपक सिंचाई और बागवानी पर दिया जोर
महुआडांड़ : किसानों को वैज्ञानिक खेती से जोड़ने के लिए बुधवार को एग्री क्लिनिक महुआडांड़ के द्वारा ग्राम होरेंगे में विशेष जागरूकता शिविर लगाया गया। शिविर का मकसद किसानों को कम पानी में अधिक उत्पादन की तकनीक और उद्यान योजनाओं की जानकारी देना था।
शिविर में एग्री क्लिनिक के अधिकारी अबु रेहान अंसारी ने मुख्य रूप से तीन विषयों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज सबसे बड़ी चुनौती पानी की कमी है। इसके समाधान के लिए किसानों को टपक सिंचाई प्रणाली अपनानी चाहिए। इससे 50 से 60 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है। साथ ही उर्वरक का उपयोग भी कम होता है। सब्जी और फल की खेती में यह तकनीक बहुत लाभकारी है।
श्री अंसारी ने कहा खाद डालने से पहले मिट्टी की जांच कराना जरूरी है। इससे पता चलता है कि मिट्टी में किस पोषक तत्व की कमी है। मिट्टी जांच के आधार पर ही खाद डालने से उपज बढ़ती है और खर्च घटता है।”
कृषि विभाग की उद्यान योजना के तहत उन्होंने स्ट्रॉबेरी, ड्रैगन फ्रूट, पपीता और केला की खेती की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नेतरहाट की जलवायु इन फसलों के लिए उपयुक्त है। सरकार इन पर अनुदान भी दे रही है। इच्छुक किसान एग्री क्लिनिक से संपर्क कर लाभ ले सकते हैं।
शिविर में नेतरहाट पंचायत के 50 किसान उपस्थित थे। एग्री क्लिनिक महुआडांड़ के संजय पांडे ने भी किसानों को योजना के फॉर्म और प्रक्रिया समझाई।अंत में अधिकारी ने कहा कि अब समय आ गया है कि पारंपरिक खेती छोड़कर आधुनिक तकनीक अपनाई जाए। किसानों ने शिविर की सराहना की।

